सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

उपराष्ट्रपति ने जोर देकर यह कहा कि सूक्ष्म लैंगिक भेदभाव चिंताजनक है, लैंगिक न्याय के लिए पुरुष मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता है, उपराष्ट्रपति ने महिलाओं से आग्रह किया, चुनौतियों का सामना करें और बाधाओं को तोड़कर आगे बढ़ें

 Imagehttps://www.meribhagidari.com/2024/09/blog-post_26.html

 "लक्षणात्मक विकृति" इन जैसी टिप्पणियां महिलाओं के खिलाफ हिंसा की बर्बरता को कम करके आंकती हैं और यह बेहद ही  शर्मनाक है- उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़जी

लोकसभा और राज्य विधानसभाओंमें महिलाओं के लिए आरक्षण एक युगांतरकारी कदम है; अतीत के गौरव को वापस पाने के लिए यह एक बड़ा प्रयास है, उपराष्ट्रपति ने आगाह किया, इवेंट मैनेजमेंट के जरिए प्रतिष्ठित हैसियत हासिल करने वाले सभी स्वार्थी लोगों से सतर्क रहें, उन्होंने कहा कि , हाल के वर्षों में महिलाओं के विकास से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास में आमूलचूल बदलाव आ रहा  है

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़जी  ने आज पुरुष मानसिकता में बदलाव लाने और व्यापक लैंगिक संवेदनशीलता के लिए भी अपील की। दिल्ली के ताज पैलेस इस होटल में आज नेटवर्क १८ समूह द्वारा आयोजित "महिला सशक्तिकरण के लिए समग्र दृष्टिकोण" इस विषय पर शी शक्ति2024 में अपना संबोधन देते हुए, श्री धनखड़जी ने समाज में फैले सूक्ष्म लैंगिक भेदभाव पर ध्यान देने पर जोर दिया। 

लैंगिक न्याय के लिए पुरुषों की मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता है, उपराष्ट्रपतिजी  ने महिलाओं से यह आग्रह किया, चुनौतियों का सामना करें और बाधाओं को तोड़कर आगे बढ़ें

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़जी कहा कि  “हमारी महिलाएं आज शासन के प्रत्येक हिस्से में भागीदारी कर रही हैं। वे  समर्पण, प्रतिबद्धता और प्रतिभाओं  का पूर्ण उदाहरण दे रही हैं। लेकिन फिर भी  लैंगिक समानता अभी भी महिलाओंसे  बहुत दूर है। किसी भी व्यवस्था में, जिसमें मेरे सामने कि मौजूद व्यवस्था भी इसमें शामिल है,  किसी न किसी तरह से , यह लैंगिक समानता हमसे दूर ही होती जा रही है। लैंगिक भेदभाव स्पष्ट तौर से तो खत्म हो गया है, लेकिन यह अब सूक्ष्म रूपों में आ गया है। ये  सूक्ष्म रूप, जिससे आप लड़ नहीं सकते, जिसे हम आप सभी परिभाषित भी नहीं कर सकते और यही वह क्षेत्र है, जिस पर हमें सबसे ज्यादा प्रहार करना है। सूक्ष्म भेदभाव प्रत्यक्ष भेदभाव से कहीं अधिक ज्यादा  खतरनाक होता है। क्योंकि प्रत्यक्ष भेदभाव का आप सब विरोध कर सकते हैं। लेकिन सूक्ष्म भेदभाव का विरोध करना मुश्किल होता है। बड़े पैमाने पर पुरुषों की सोच में बदलावों  की जरूरत है। मानवीय गतिविधियों  के हर एक  पहलू में गैर-भेदभावपूर्ण समान अवसरपर  लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए सबसे जरूरी है।”

महिलाओंके खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर की गई "लक्षणात्मक विकृति" जैसी टिप्पणियों को बेहद शर्मनाक और ऐसे जघन्य अपराधों की बर्बरता को कम करने के आंकने के समान बताते हुए, श्री धनखड़जी ने कहा, "हमें इस तरह के पागलपनसे  भरे विचारों को पूरी तरह से नकारना और तिरस्कार करना चाहिए, जो कि कोलकाता में हुए अस्पताल में ड्यूटी के दौरान एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या जैसी  बर्बरता को कम करके आंकते हैं और कुछ लोग इसे लक्षणात्मक विकृति कहते हैं, यह हमारे लिए  कितने शर्म की बात है। हम अपनी अंतरात्मा के प्रति भी  जवाबदेह हैं, हमारा हृदय द्रवित होना ही चाहिए। ये मुद्दा अब प्रायश्चित्त करनेका है, सुधार की मुद्रा में आने का है।”

लोकसभा व  राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण के प्रावधान की सराहना करते हुए, श्री धनखड़जी  ने इस बात पर जोर दिया कि यह एक युगांतरकारी कदम है। समग्र महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह अब तक का सबसे प्रभावशाली कदम है। उन्होंने कहाकि , "यह सभीं नीतियों के विकास और विधायिका व कार्यपालिका में ठोस भागीदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा"।

इवेंट मैनेजमेंट के जरिए प्रतिष्ठित हैसियत हासिल करने वाले सभी स्वार्थी लोगों से सतर्क रहने के लिए आगाह करते हुए श्री धनखड़जी  ने रेखांकित किया, ''पत्रकारिता से लेकर हर सभी क्षेत्रों में, हमारे देश में, हमने लोगों को प्रतिष्ठित व्यक्ति का दर्जा दे रखा  है, नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है, किस लिए? क्योंकि वे इवेंट मैनेजमेंट में अच्छे हैं इसलिए ?या  क्या वे उनके मामले ठीक तरह से सुलझाते हैं? वो इसलिए महान बन जाते हैं क्योंकि हम सतर्क नहीं हैं, फिर वे हमारे मार्गदर्शक बन जाते हैं और फिर वे यह कहते हैं कि ओह... जो बांग्लादेश में हुआ वो यहां पर भी हो सकता है। मैं आपसे आज यह कहता हूं कि,  हमारी सोच में बदलाव यह ना ही केवल लैंगिक न्याय के लिए जरूरी है, बल्कि हमारी  सोच में बदलाव आना अब राष्ट्रवाद के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के लिए भी बहुत  ही जरूरी है। हम और अब  लोगों को अपने स्वार्थी और पक्षपातपूर्ण हितों के लिए दिन-बो -दिन राष्ट्रीय हितों  की अनदेखी करने की अनुमति कभी नहीं दे सकते! इस देश में हमें अब यह समझना ही होगा कि हम ५००० वर्ष से भी अधिक पुरानी सभ्यता हैं, जो सद्गुणों और उदारता से गहराई से जुड़ी हुई है...''

अपने संबोधन में श्री धनखड़जी  ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि,  हाल ही के वर्षों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न सकारात्मक कार्यों के जरिए प्रयास किए जा रहे हैं व  महिला विकास से महिला नेतृत्व वाले विकास में आमूलचूल बदलाव भी आ रहा  है। उन्होंने कहा कि अब बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना जैसे  व  रक्षा इन सभी क्षेत्र में महिलाओं के प्रवेश और जैसे अंतरिक्ष, समुद्र या स्थल, इन सभी क्षेत्रों में उनके योगदान ने परिदृश्य को बड़े पैमाने पर बदल दिया है।

उन्होंने यह कहाकि  "मैं ये नहीं कहूंगा कि बीते एक दशक में ये आमूलचूल बदलाव आया है। लोग इसे बस एक राजनीतिक बिंदु के रूप में लेंगे, लेकिन ये ऐसा ही है- बेटी पढ़ाओ, मुद्रा ने सभी महिलाओं को एक प्रकार की स्वतंत्रता दी है। वे अब नौकरी देने वाली हो गई हैं। वो स्वयं को नौकरी दे रही हैं और दूसरों को भी  नौकरी दे रही हैं- एक बड़ा बदलाव और इसके चलते ये आदर्श बदलाव महिलाओं के विकास से सभी महिला के नेतृत्व में विकास तक पहुंच गया है। कुछ पुरुषों को छोड़ दें, तो बाकी सभी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बजट प्रस्तुत किए जाने की प्रशंसा ही की है। उन्होंने सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनकर इतिहास ही रचा है, और उन्होंने मोरारजी देसाईजी  को भी पीछे छोड़ते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया है।"

महिलाओं से अपील करते हुए श्री धनखड़जी  ने कहा, ''कृपया महिलाए उन चुनौतियों का सामना करें और आपकी खुद कि  प्रगति में आने वाली हर बाधाओं को पार करके आगे बढ़ें और बढ़ते रहे  और मैं आपको बता दूं कि यह बाधाएं तो कुछ भी नहीं हैं, केवल आपको बीएस अब नेतृत्व करना है। अब केवल बदलाव का समय आ गया है, आपको बदलाव चाहने की बजाय बदलाव लाने की चाह करनी होगी। आप अब केवल गाड़ी में बैठने वाली यात्री नहीं हैं, आप अब ड्राइवर भी  हैं और इसलिए इसे चलाएं।''

भारत की सभी संरचनात्मक लोकतांत्रिक व्यवस्था पर ध्यान खींचते हुए उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि गांव के सभी स्तरों  पर, प्रादेशिक स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर भारत का लोकतंत्र संरचनात्मक है और १.४ मिलियन महिलाएं पंचायती राज में निर्वाचित होती हैं।

उपराष्ट्रपति जी ने कहा "लोकतंत्र अपने आप में एक एसा  तंत्र है जो न तो केवल अमीर वर्ग के लिए है, ना  ही विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए है, न तो विशेषाधिकार प्राप्त वंश के लिए है, लोकतंत्र प्राथमिक रूप से किसके लिए है? ये उनसभी के  लिए है जो कमजोर हैं, जो हर चुनौतियों का सामना करते हैं, जिनको सहारे की जरूरत है, ताकि असली प्रतिभा जो चुनौतियों के कारन  से बाधित है, वह दूर हो जाए।"

लैंगिक समानता के लिए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री धनखड़जी ने कहा, "मैं शिक्षा का उत्पाद हूं! शिक्षा ही एक एसा प्रारंभिक बिंदु है. जो शिक्षा मिलेगी तो असमानता की जंजीरें टूट जाएंगी। कई लोगों ने ठीक ही कहा है, आप जब एक  लड़के को शिक्षित करते हैं - तो आप एक को ही शिक्षित करते हैं। अगर आप लड़की को शिक्षित करते हैं - तो आप एक पुरे  परिवार को शिक्षित करते हैं और ये जमीनी हकीकत है। मैंने हमेशा से ये माना है, और यही जाना है और मुझे पूरा यकीन है कि कोईभी  इससे इनकार नहीं कर सकता। समाज में असमानताओं को दूर करने, हर जगह समान अवसर पैदा करने और समानता लाने के लिए शिक्षा ही  सबसे प्रभावशाली परिवर्तनकारी तंत्र है। यह बड़े पैमाने पर किया जा रहा है और इसका परिणाम भी उत्साहजनक हैं।"

 

***

एमजी/एआर/एमएम/एसके प्रविष्टि तिथि: 16 SEP 2024 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 2055622) आगंतुक पटल : 37

अगर आप महिला अधिकार और सुरक्षा के विषयों पर अपना योगदान देना चाहते है डेली अपडेट हेतु फ़ॉलोअर बनिए

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, प्रतिबंध आणि निवारण) कायदा २०१३ या कायदानुसार, कामाच्या ठिकाणी लैंगिक छळ म्हणजे काय?

  जर हा प्रश्न तुमच्यासमोर असेल तर खालील माहिती तुमच्यासाठी आहे… सुरक्षित आणि गरिमापूर्ण वातावरण असणारे  कामाचे  ठिकाण असे असायला हवे कि ,ज्यामध्ये लैंगिक छळ थांबवन्यास कायदेशीर व्यवस्था असेल  आणि कामाच्या ठिकाणावर काम करनारया सर्व लोकानाही माहित असयाला हवे की अनिष्ट कृत्य किंवा वर्तन कोणते आहेत कामाची ठिकाणे लैंगिक छळापासून मुक्त राहावीत आणि महिलांना सुरक्षित आणि सुरक्षित वातावरण मिळावे यासाठी हा कायदा तयार करण्यात आला आहे . कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, प्रतिबंध आणि निवारण) कायदा , २०१३ या कायदानुसार, कामाच्या ठिकाणी लैंगिक छळ म्हणजे काय? लैंगिक छळ म्हणजे  खाली नमूद केलेली थेट अथवा गर्भितार्थ कृती किंवा वागणूक लैंगिक छळ हे जे कि , कोणतेही अनिष्ट कृत्य किंवा वर्तन आहे (मग ती व्यक्त किंवा निहित), जसे :- शारीरिक संपर्क किंवा आगाऊ  लैंगिक अनुकूलतेसाठी मागणी किंवा विनंती  लैंगिक रंगीत टिप्पणी करणे  पोर्नोग्राफी दाखवत आहे  लैंगिक स्वभावाचे इतर कोणतेही शारीरिक, शाब्दिक किंवा गैर-मौखिक असे आचरण. लैंगिक अर्थाच्या टिप्पणी कामाच्या ठिक...

महिलाओं की व्यवहारिक सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करवाने के लिए शासन ने नियम कानून बना दिया है और प्रत्येक कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत समिति का अनिवार्यतः गठन करने का निर्देश भी जारी कर दिया है... आप भी इस समिति की अधिकृत सदस्य बन सकती है पढ़िए कैसे...

शासकीय कार्यालयों के आंतरिक शिकायत समिति के बाहरी सदस्य बनिए और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाकर महिला शक्तिकरण के लिए अग्रणी भूमिका निभाईये... आंतरिक शिकायत समिति का महत्व आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से मुक्त, सुरक्षित और भय-रहित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत गठित की जाती है। आंतरिक शिकायत समिति के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु: 1. महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण: आईसीसी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। यह महिलाओं को डर और भय के बिना काम करने का माहौल प्रदान करती है। 2. यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निवार ण: आईसीसी यौन उत्पीड़न की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष तरीके से निवारण करती है। यह शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को सुनवाई का अवसर प्रदान करती है। 3. यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता: आईसीसी यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता बनाए रखती है। यह शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी को गुप्त रखती है। 4. ज...

किलकारी योजना मोबाइल-आधारित सेवा है, जो गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को सीधे गर्भावस्था, प्रसव और शिशु देखभाल के बारे में संदेश देकर उन्हें नवजात शिशु की देखभाल हेतु स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह एक ध्वनि-आधारित सेवा है और इसलिए ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों के बाद भी सहायता करने में सक्षम है

  किलकारी योजना पर अपडेट प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर जितनी भी महिलाए पंजीकृत हुई है , उन  महिलाओं को किलकारी योजना के माध्यम से संवादात्मक ध्वनि प्रतिक्रिया के जरिये गर्भावस्था , प्रसव और बच्चे की देखभाल के बारे में मुफ्त व साप्ताहिक अंतराल में समय-समय पर आवश्यक श्रव्य संदेश दिए जाते हैं,  और किलकारी योजना वर्तमान में २०   राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है गर्भवती माताओं के लिए  किलकारी कार्यक्रम १५   जनवरी , २०१६  को डिजिटल इंडिया पहल के एक भाग के रूप में यह एक नई मोबाइल-आधारित सेवा है , जो गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य इन सभी लाभार्थियों को यानी सभी पंजीकृत महिलाओं को  सीधे गर्भावस्था , प्रसव और शिशु देखभाल के बारे में संदेश देकर उन्हें नवजात शिशु की देखभाल हेतु स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह सेवा  ध्वनि-आधारित सेवा है और इसलिए यह सेवा ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों के बाद भी सहायता करने में सक्षम है। प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकृ...

महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 का उद्देश्य क्या है और इस अधिनियम के कार्यान्वयन की पूरी जानकारी इस वेब पेज पर है, पढ़िए कैसे ICC कामकाजी महिलाओं को संरक्षण देती है और कैसे कोई भी महिला अपने लिए गरिमामई कामकाजी वातावरण बना सकती है Sec 1

  प्रश्न / 1 / महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम , 2013 बनाए जाने का मुख्य उद्देश्य क्या है ? उत्तर / 1 / इस अधिनियम के उद्देश्य को अधिनियम शीर्ष में स्पष्ट करते   हुए अभिलिखित किया गया है कि, महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण और लैंगिक उत्पीड़न के परिवादों के निवारण तथा प्रतितोषण और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए यह अधिनियम बनाया गया है । जिसके विभिन्न व्यवहारिक पहलु है इन पहलुओं को आसानी से समझने के लिए अग्रलिखित्त बिंदुवार विश्लेषण किया गया है :- अधिनियम के उद्देश्य को तिन विशिष्ट भागों में बाटा गया है वे हैं :- A / महिलाओं   के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण :- कामकाजी महिलाओं को उनके कार्यस्थल पर सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण स्थापित करने के लिए महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम , 2013 अधिनियमित किया गया है | B / लैंगिक उत्पीड़न के परिवादों के निवारण तथा प्रतितोषण लैंगिक उत्पीडन जैसे घृणित और असहनीय मा...

महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए कि गई प्रमुख पहलों की जानकारी

  Mission Shakti  महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा कि गई प्रमुख पहलों की जानकारी भारत देश में महिला सशक्तिकरण की नई परिभाषा महिलाओं का सशक्तिकरण यह एक परिवर्तनकारी प्रक्रिया है,   जो महिलाओं को आर्थिक , सांस्कृतिक , सामाजिक /   राजनीतिक जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्राप्त हों , यह सुनिश्चित करती है। यह न केवल महिलाओं की व्यक्तिगत क्षमता को ही बढ़ाता है , बल्कि सामाजिक प्रगति में भी योगदान देता है। भारत देश ने महिलाओं को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है , उनकी सुरक्षा , आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक समावेश पर ध्यान केंद्रित किया है। यह दस्तावेज़ महिला सशक्तिकरण में भारत की प्रगति को आगे बढ़ाने वाले कुछ प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है , जो एक अधिक न्यायसंगत और समावेशी समाज बनाने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। मिशन शक्ति मंत्रालय ने १५ वें वित्त आयोग की अवधि 2021-22 से 2025-26 के दौरान महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक ...

छत्तीसगढ़ की सशक्त समाजसेवी महिलाओं को जानकारी उपलब्ध करवाने वाले डिजिटल मंच पर प्रकाशित की गई है सारी जानकारी.............. जानिये कैसे आप भी बन सकती है स्कुल, कॉलेज, अस्पताल, उद्योग, शासकीय कार्यालयों जैसे संस्थान के आंतरिक परिवाद समिति की सदस्य ........................................................ पढ़िए और जानिए एक सशक्त महिला होने का अवसर आपके पास भी कैसे है ! ................................... उम्र, शैक्षणिक योग्यता, राजनैतिक पद जैसे विषय आपको अपनी सशक्त प्रशासनिक भूमिका बनाने से रोक नहीं सकते हैं .................................. क्योकि महिलाओं के मुद्दों को दृढ़ता से रखने की सक्षमता रखने वाली महिला को आतंरिक परिवाद समिति का सदस्य बनाया जाता है .... नीचे लिखी है पूरी जानकारी 👇👇👇

  पहल करिये आंतरिक परिवाद समिति का गठन करवाने के लिए पहल करिये यदि आप कामकाजी महिला है तो अपने कार्यालय में इस समिति का गठन करवाईये और यदि कामकाजी महिला नहीं हैं तो अपने आस पास के कार्यस्थलों में आंतरिक परिवाद समिति बनवाने के लिए पहल करिए जानकारी मांगिये आपकी सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करवाना अब आपके हाथों में है क्योंकि महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम , 2013 आपको यह अधिकार प्रदान करता है की आप जिस भी कार्यक्षेत्र में जायेंगे वहां आपको उस कार्यक्षेत्र की आंतरिक परिवाद समिति का संरक्षण मिले इसलिए सभी कार्यस्थलों से आंतरिक परिवाद समिति गठन की जानकारी मांगिये |   भागीदारी दीजिए जिन कार्यस्थलों के नियोक्ताओं ने स्वविवेक से अपने कार्यस्थल पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया है उन कार्यस्थलों के कामकाजी माहौल को गरिमापूर्ण बनाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करिए और इस विषय की जानकारी को साझा करने का माध्यम बनिए । प्रश्न पुछिये ? जिन कार्यस्थलों पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन नही किया गया है ऐसे कार्यस्थलों के नियोक्ता...

वन स्टॉप सेंटर - यह घरेलू और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को हिंसा और संकट से निपटने के लिए एक ही छत के नीचे एकीकृत सहयोग और सहायता प्रदान करता है।

  वन स्टॉप सेंटर - वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) यह   मिशन शक्ति के अंतर्गत चलाए जा रही संबल पहल का घटक है।   वन स्टॉप सेंटर घरेलू और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को हिंसा और संकट से निपटने के लिए एक ही छत के नीचे एकीकृत सहयोग और सहायता प्रदान करता है। वन स्टॉप सेंटर जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता , कानूनी सहायता और सलाह , अस्थायी आश्रय , पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करता है। देश भर में संचालित ८०२   वन स्टॉप सेंटर से दस  लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली - आज की तारीख में , स्वीकृत 878 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) में से , देश भर में 802 ओएससी चालू हैं और इनमें 31 अक्टूबर , 2024 तक 10.12 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा , शक्ति सदन मिशन शक्ति के तहत सामर्थ्य पहल का यह एक घटक है। यह तस्करी करके लाई गई महिलाओं सहित संकटग्रस्त सभी महिलाओं के लिए एकीकृत राहत व  पुनर्वास गृह है।   वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) का   उद्देश्य यह है कि संकट की स्थिति में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सक्षम वातावरण बन...

कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा… एक गंभीर विषय है गौरतलब रहे की इस ज्वलंत विषय पर सभी शिकायत तो करते हैं लेकिन अपनी नागरिक जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं इसलिए जानिए महिला सुरक्षा को लेकर क्या है आपकी नागरिक जिम्मेदारी…

भारत में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा एक ज्वलंत विषय है। कामकाजी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में होती गुणात्मक वृद्धि के साथ, यह चिंता बढ़ रही है कि. कार्यस्थल में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यहां कुछ मुख्य मुद्दे दिए गए हैं: यौन उत्पीड़न:   यह एक गंभीर समस्या है, जिसमें महिलाओं को अवांछित टिप्पणी, छूना, या यौन संबंध बनाने के लिए दबाव सहना पड़ता है। भेदभाव:   महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन, कम पदोन्नति के अवसर और कम सुविधाएं मिल सकती हैं। असुरक्षित कार्य वातावरण:   कुछ कार्यस्थलों में महिलाओं को असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि खराब रोशनी, अपर्याप्त सुरक्षा उपाय, और लंबे समय तक काम करना। गौरतलब रहे कि, आप भी शासकीय तंत्र का हिस्सा बनकर महिला सुरक्षा के लिए अधिकृत संरक्षक की भूमिका निभा सकते हैं  इस लिंक पर है पूरी जानकारी क्लिक करिए  आप सूचना का अधिकार प्रयोग कर महिला सुरक्षा सुनिश्चित करवा सकते हैं उल्लेखनीय है की आप इस लिंक से सूचना का अधिकार आवेदन कॉपी कर करके सभी शासकीय कार्यालयों के मुखिया को सबक सिखा सकते हैं  RTI आवेदन कॉ...

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (शी-बॉक्स) का आयोजन इस पहल का उद्देश्य देश भर के कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना है

केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने ' शी-बॉक्स ' लोगो , पॉश स्वैच्छिक अनुपालन जाँच सूची , मिशन शक्ति ऐप के साथ ' शी-बॉक्स ' का एकीकरण और ' शी-बॉक्स ' पोर्टल पर कर्मयोगी भारत पॉश प्रशिक्षण लिंक का शुभारंभ कियाराष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा प्रतिज्ञा दिलाई गई , इस पहल का उद्देश्य देश भर के कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना है   महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज ( 14 फरवरी 2026) विज्ञान भवन , नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (शी-बॉक्स) पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ; महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर और संसद सदस्यों- श्री सुधांशु त्रिवेदी , श्रीमती रेखा शर्मा , श्रीमती लवली आनंद और श्रीमती शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी ; आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय समितियों (एलसी) ...

सर्व क्षेत्रांतील महिलांसाठी कामाच्या ठिकाणी सुरक्षित, सन्मानजनक आणि छळमुक्त वातावरण निर्माण होईल याची सुनिश्चित करण्याच्या सरकारच्या वचनबद्धतेचा पुन्हा अधोरेखित करणे आणि कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, मनाई आणि निवारण) कायदा, 2013 (पॉश कायदा) च्या अंमलबजावणीला बळकटी देणे

  महिला आणि बाल विकास मंत्रालयाच्या वतीने उद्या ( 14 फेब्रुवारी 2026) विज्ञान भवन येथे कामाच्या ठिकाणी महिला सुरक्षा (शी-बॉक्स) विषयावरील राष्ट्रीय परिषदेचे आयोजन , केंद्रीय महिला आणि बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी बीजभाषण करणार तसेच राष्ट्रीय कार्यस्थळ सुरक्षा प्रतिज्ञा देणार   कामाच्या ठिकाणी महिलांसाठी सुरक्षित , सन्मानजनक आणि छळमुक्त वातावरण निर्माण करण्याप्रति सरकारची वचनबद्धता पुन्हा अधोरेखित केली जाणार   महिला आणि बाल विकास मंत्रालयाच्या वतीने उद्या ( 14 फेब्रुवारी 2026) विज्ञान भवन इथे कामाच्या ठिकाणी महिलांची सुरक्षा (शी-बॉक्स) या विषयावरील राष्ट्रीय परिषदेचे आयोजन करण्यात आले आहे. केंद्रीय महिला आणि बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी , महिला आणि बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकूर या परिषदेत सहभागी होणार आहेत. यासोबतच केंद्र सरकारची मंत्रालये/विभाग आणि राज्ये/केंद्रशासित प्रदेशांचे वरिष्ठ अधिकारी , अंतर्गत समित्या/स्थानिक समित्यांचे अध्यक्ष आणि सदस्य , समन्वय अधिकारी , आंतरराष्ट्रीय संस्था , उद्योग क्षेत्रातील आघाडीची व्यक्तिमत्वे , नागरी समाजाचे प्रति...