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कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा: जानिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और कामकाजी महिलाओं के अपने व्यक्तिगत कानूनी अधिकार जो किसी भी कार्यस्थल पर महिलाओं द्वारा अभिप्राप्त करने का अधिकार भारतीय संविधान देता है ।

आंतरिक शिकायत समिति ICC से परिचय (Introduction with Internal complains committee) 


सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल पाने का पूरा हक प्रत्येक कामकाजी महिला का है जिसकी सुनिश्चितता करवाती है POSH एक्ट 2013 के तहत गठित कार्यालय की ICC 

भारत में हर कामकाजी महिला को एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल पाने का पूरा हक है। अक्सर जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं दफ्तरों में होने वाले दुर्व्यवहार पर चुप रह जाती हैं, इसलिए POSH एक्ट 2013 की पूरी जानकारी होना हर महिला के लिए आवश्यक है। इस कानून के तहत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति गठित किया जाना अनिवार्य है । इसीलिए यह कानून क्या है और इसका गठन कैसे होता है, यह जानना बेहद ज़रूरी है। यदि आप भी किसी समस्या का सामना कर रही हैं, तो डरें नहीं; कार्यस्थल पर प्रताड़ना की शिकायत कहाँ करें और ICC में शिकायत दर्ज करने की समय सीमा क्या है, इसकी पूरी कानूनी प्रक्रिया समझना ही आपके सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है।

आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन कैसे होता है? 

कानून के अनुसार, यदि किसी सरकारी या निजी संस्थान में 10 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं, तो वहाँ नियोक्ता (Employer) द्वारा इस समिति का गठन करना अनिवार्य है। इस समिति की संरचना कुछ इस प्रकार होती है:

  • पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer): संस्थान की एक वरिष्ठ महिला कर्मचारी।
  • कर्मचारी सदस्य: दो या दो से अधिक कर्मचारी जो महिलाओं के मुद्दों या कानूनी ज्ञान के प्रति समर्पित हों।
  • बाहरी सदस्य (External Member): किसी गैर-सरकारी संगठन (NGO) से या लैंगिक मुद्दों पर विशेषज्ञ व्यक्ति।
  • अनिवार्य नियम: समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम 50% सदस्य महिलाएं होनी चाहिए।

कार्यस्थल पर प्रताड़ना की शिकायत कहाँ करें और कैसे करें?

यदि किसी महिला को कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के लैंगिक दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो वह सीधे अपने दफ्तर की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को लिखित में शिकायत दे सकती है।

  • समय सीमा: घटना होने के (3 महीने) के भीतर लिखित शिकायत दी जानी चाहिए। विशेष परिस्थिति में समिति इस अवधि को 3 महीने और बढ़ा सकती है ।
  • सुलह (Conciliation): जांच शुरू होने से पहले, महिला की मांग पर आपसी बातचीत से मामला सुलझाने का प्रयास किया जा सकता है (लेकिन इसमें कोई वित्तीय समझौता नहीं होगा)।
  • निष्पक्ष जांच: यदि सुलह संभव नहीं है, तो समिति 90 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करेगी।
  • ऑनलाइन माध्यम: यदि दफ्तर में समिति नहीं है, तो महिला भारत सरकार के SHe-Box (शी-बॉक्स) पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है।

 शिकायतकर्ता महिला के मुख्य अधिकार

इस प्रक्रिया के दौरान कानून महिलाओं को बेहद मजबूत अधिकार प्रदान करता है, ताकि वे बिना किसी डर के आवाज़ उठा सकें:

गोपनीयता का अधिकार: शिकायत करने वाली महिला और आरोपी की पहचान को पूरी तरह गुप्त रखा जाता है। इसे उजागर करना कानूनी अपराध है।

  • अंतरिम राहत (Interim Relief): जांच के दौरान महिला को किसी अन्य विभाग में ट्रांसफर या सवैतनिक छुट्टी (Paid Leave) दी जा सकती है, ताकि उसे दफ्तर में असहज महसूस न हो।
  • नौकरी की सुरक्षा: शिकायत दर्ज करने के कारण महिला की नौकरी या प्रमोशन पर कोई आंच नहीं आ सकती।
  • निष्कर्ष (Conclusion) चुप रहना किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह गलत व्यवहार को बढ़ावा देता है। यदि आप छत्तीसगढ़ में एक कामकाजी महिला हैं, तो अपने अधिकारों को पहचानें और 'मेरी भागीदारी' के इस अभियान का हिस्सा बनकर अन्य महिलाओं को भी जागरूक करें।

प्रत्येक महिला का सहायता नंबर : राष्ट्रीय महिला हेल्पलाइन नंबर: 1091

छत्तीसगढ़ महिला आयोग सहायता: https://cgwcd.gov.in/mahila-ayog

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