सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

आपके प्रश्नों के उत्तर निचे है

आंतरिक और स्थानीय समितियों के लिए जांच प्रक्रियाओं पर पुस्तिका जारी, कार्यस्थल पर सुरक्षा को मजबूत करना, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और समावेशी राष्ट्रीय विकास हासिल करने के लिए यह अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है: श्रीमती अन्नपूर्णा देवी

विज्ञान भवन में पॉश एक्ट पर दो दिवसीय राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ,  कार्यस्थल पर सुरक्षा को मजबूत करना , कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और समावेशी राष्ट्रीय विकास हासिल करने के लिए यह अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है: श्रीमती अन्नपूर्णा देवी आंतरिक और स्थानीय समितियों के लिए जांच प्रक्रियाओं पर पुस्तिका जारी कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम , निषेध और निवारण) अधिनियम , 2013 पर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्‍ल्‍यू) के दो दिवसीय राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम का आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी , कानूनी विशेषज्ञ , आंतरिक और स्थानीय समितियों के प्रतिनिधि , नागरिक समाज संगठन और अन्य हितधारक पॉश अधिनियम के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे बेहतर ढंग से लागू किए जाने से जुड़ी चर्चाओं के लिए एक साथ उपस्थिति रहे। श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मह...
हाल की पोस्ट

एसएचई-बॉक्‍स 2.0 ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के कार्यान्वयन को किया मजबूत

  केद्र सरकार महिलाओं के लिए एक सुरक्षित , समावेशी और सशक्त इकोसिस्‍टम को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध , एसएचई-बॉक्‍स 2.0   ने  कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम , निषेध और निवारण) अधिनियम , 2013 के कार्यान्वयन को किया मजबूत यह एक सशक्‍त प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफॉर्म है , जो महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों को दर्ज करने और उनकी प्रगति पर नजर रखने के लिए एकल-खिडकी सुविधा प्रदान करता है , केंद्र सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा , गरिमा और भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई संरचनात्मक और नीतिगत कदम उठाए हैं। इनमें से एक प्रमुख क्षेत्र सुरक्षित कार्यस्थलों का निर्माण रहा है , जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और कार्यबल में उनकी निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इस दिशा में महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सरकार का प्रमुख कार्यक्रम , मिशन शक्ति , योजनाओं के समन्वय और संस्थागत तंत्रों को मजबूत करने के लिए एक एकीकृत ढांचा प्रदान करता है। यह देश भर में महिलाओं के लिए कानूनों और सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्या...

(SHe-Box 2.0) एक सुरक्षित, गोपनीय आणि वापरण्यास अतिशय सोपे असे पोर्टल आहे. या पोर्टलमुळे महिलांना कोणतीही भीती, लज्जा न बाळगता अथवा कोणी आपला सूड उगवेल याचे भय न बाळगता घटनेची तक्रार करण्यास बळ मिळते

महिलांसाठी सुरक्षित , सर्वसमावेशक आणि सशक्त परिसंस्था – SHe-Box 2.0 ( संक्षिप्त सारांश) केंद्र सरकार महिलांसाठी सुरक्षित , सन्मानजनक आणि सर्वसमावेशक कार्यस्थळ निर्माण करण्यासाठी वचनबद्ध आहे. महिलांच्या आर्थिक सक्षमीकरणासाठी आणि रोजगारातील सातत्यपूर्ण सहभागासाठी सुरक्षित कार्यस्थळांवर भर देण्यात आला आहे. मिशन शक्ती अंतर्गत महिलांची सुरक्षा , संरक्षण आणि सक्षमीकरणासाठी विविध योजना आणि संस्थात्मक यंत्रणा एकत्रितपणे राबवल्या जात आहेत. कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध , मनाई आणि निवारण) अधिनियम , 2013 (POSH Act) प्रभावीपणे राबवण्यासाठी SHe-Box 2.0 पोर्टल विकसित करण्यात आले आहे. पूर्वीच्या SHe-Box पेक्षा SHe-Box 2.0 अधिक व्यापक , पारदर्शक आणि उत्तरदायी डिजिटल तक्रार निवारण प्रणाली उपलब्ध करून देते. SHe-Box 2.0 ची प्रमुख वैशिष्ट्ये कार्यस्थळी लैंगिक छळाच्या तक्रारी ऑनलाइन नोंदविण्याची सुविधा. तक्रारींच्या प्रगतीवर ऑनलाइन देखरेख ठेवण्याची सुविधा. राज...

कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा: जानिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और कामकाजी महिलाओं के अपने व्यक्तिगत कानूनी अधिकार जो किसी भी कार्यस्थल पर महिलाओं द्वारा अभिप्राप्त करने का अधिकार भारतीय संविधान देता है ।

आंतरिक शिकायत समिति ICC से परिचय (Introduction with Internal complains committee)  सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल पाने का पूरा हक प्रत्येक कामकाजी महिला का है जिसकी सुनिश्चितता करवाती है POSH एक्ट 2013 के तहत गठित कार्यालय की ICC  भारत में हर कामकाजी महिला को एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल पाने का पूरा हक है। अक्सर जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं दफ्तरों में होने वाले दुर्व्यवहार पर चुप रह जाती हैं, इसलिए POSH एक्ट 2013 की पूरी जानकारी होना हर महिला के लिए आवश्यक है। इस कानून के तहत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति गठित किया जाना अनिवार्य है । इसीलिए यह कानून क्या है और इसका गठन कैसे होता है, यह जानना बेहद ज़रूरी है। यदि आप भी किसी समस्या का सामना कर रही हैं, तो डरें नहीं; कार्यस्थल पर प्रताड़ना की शिकायत कहाँ करें और ICC में शिकायत दर्ज करने की समय सीमा क्या है, इसकी पूरी कानूनी प्रक्रिया समझना ही आपके सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन कैसे होता है?  कानून के अनुसार, यदि किसी सरकारी या निजी संस्थान में 10 से अधिक...

यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी-बॉक्स) पोर्टल- कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक डिजिटल शासन पहल

 यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी-बॉक्स) पोर्टल -   कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम , निषेध और निवारण) अधिनियम (पीओएसएच अधिनियम) , 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) ने 29 अगस्त 2024 को एक डिजिटल शासन पहल के रूप में यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (शी-बॉक्स) पोर्टल ( https://shebox.wcd.gov.in/ ) का शुभारंभ किया। 27 मार्च 2026 तक , सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में 10 से अधिक कर्मचारियों वाले 1,61000 से अधिक कार्यस्थलों को पोर्टल पर पंजीकृत किया जा चुका है। इनमें से , पंजीकृत कार्यस्थलों द्वारा 68,460 से अधिक आंतरिक समितियों (आईसी) का विवरण अपडेट किया जा चुका है। पोर्टल पर जिला स्तर की 777 स्थानीय समितियों (एलसी) का विवरण भी उपलब्ध है। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने और व्यापक पहुंच के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए , एमडब्ल्यूसीडी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय , श्रम एवं रोजगार मंत्रालय , वित्तीय सेवा विभाग , राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग , अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद , उ...

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (एसएच अधिनियम) लागू किया, जिसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है। यह अधिनियम सभी महिलाओं, चाहे उनकी आयु या रोजगार की स्थिति कुछ भी हो, पर लागू होता है। इसकी संरक्षा के दायरे में घरेलू कामगारों सहित सार्वजनिक व निजी, संगठित या असंगठित क्षेत्र के सभी कार्यस्थल आते हैं

  सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम , 2013 को लागू किया , जिसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न , भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में निहित समानता , स्वतंत्रता और जीवन के मौलिक अधिकारों और अनुच्छेद 19(1)( जी) के तहत किसी भी पेशे को अपनाने या किसी भी व्यवसाय , व्यापार या कारोबार को चलाने के अधिकार , जिसमें सुरक्षित कार्य वातावरण भी शामिल है , का गंभीर उल्लंघन है। यौन उत्पीड़न एक असुरक्षित कार्य वातावरण का निर्माण करता है , जिससे श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी बाधित होती है और उनके आर्थिक सशक्तिकरण एवं समावेशी विकास के लक्ष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भारत सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम , निषेध और निवारण) अधिनियम , 2013 ( एसएच अधिनियम) लागू किया , जिसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है। यह अधिनियम सभी महिलाओं , चाहे उनकी आयु या रोजगार की स्थिति कुछ भी हो , पर लागू ...

महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में विभिन्न विधायी और योजनागत उपायों कि जानकारी

  सरकार महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है , और इस संबंध में उसने विभिन्न विधायी तथा योजनागत उपाय किए हैं   “ पुलिस” और “सार्वजनिक व्यवस्था” भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने , नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करने—जिसमें दहेज और दहेज मृत्यु से जुड़े मामलों की जांच और अभियोजन भी शामिल है—की ज़िम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है , और वे इन मामलों से निपटने में सक्षम हैं।   दहेज निषेध कानून , 1961 और भारतीय न्याय संहिता , 2023 में दहेज की बुराई से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं। यह कानून दहेज देने या लेने पर रोक लगाता है और उसे दंडनीय अपराध बनाता है , ताकि महिलाओं को दहेज उत्पीड़न से बचाया जा सके। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण कानून , 2005 दहेज उत्पीड़न को घरेलू हिंसा के दायरे में परिभाषित करता है , और इसके तहत सुरक्षा आदेश , निवास आदेश , अभिरक्षा आदेश , आर्थिक राहत , मुआवज़ा आदेश आदि जैसे उपाय उपलब्ध कराता है। महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित ...

महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए उठाए गए कदम

  भारतीय न्याय संहिता , 2023 के तहत महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संबंधित प्रावधानों को एक ही अध्याय में संकलित किया गया है , जिसमें अपराधियों के लिए मृत्युदंड तक की कड़ी सजा का प्रावधान है। नए कानूनों के अनुसार , 18 वर्ष से कम आयु की युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी को शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास या मृत्युदंड दिया जाएगा , साथ ही शादी , नौकरी या पदोन्नति का झूठा वादा करने अथवा पहचान छिपाकर यौन संबंध बनाने को भी अब एक नए विशिष्ट अपराध के रूप में शामिल किया गया है। न्यायिक प्रक्रिया की गति , दक्षता और पारदर्शिता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने के लिए नए आपराधिक कानूनों में यह प्रावधान किया गया है कि समन और वारंट जारी करने , उनकी तामील और निष्पादन , शिकायतकर्ता एवं गवाहों की जांच , साक्ष्य रिकॉर्ड करने तथा अपील या किसी भी अन्य अदालती कार्यवाही को इलेक्ट्रॉनिक संचार या ऑडियो-वीडियो माध्यमों से डिजिटल रूप में संचालित किया जा सकता है। इस संबंध में , सरकार ने ई-समन , ई-साक्ष्य और न्याय-श्रुति (वीसी) जैसे अनुप्रयोग भी विकसित किए हैं। ई-समन इलेक्ट्र...

अगर आप महिला अधिकार और सुरक्षा के विषयों पर अपना योगदान देना चाहते है डेली अपडेट हेतु फ़ॉलोअर बनिए