सरकार महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस संबंध में विभिन्न हस्तक्षेप किए गए हैं
“पुलिस” और “सार्वजनिक व्यवस्था” भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं। तदनुसार, कानून और व्यवस्था बनाए रखने, मामलों की जांच, अभियोजन तथा दोषसिद्धि और महिलाओं तथा बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में अभियोजन, जिनमें महिलाओं की घरेलू हिंसा से सुरक्षा भी शामिल है, की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन पर है; ये ऐसे अपराधों/आपराधिक कृत्यों से निपटने में सक्षम हैं।
हालांकि, केंद्रीय सरकार महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने को सर्वोच्च
प्राथमिकता देती है और इस संबंध में विभिन्न हस्तक्षेप किए हैं, जिनमें घरेलू हिंसा की शिकार/सर्वाइवर महिलाओं को समर्थन प्रदान करने के
उपाय भी शामिल हैं।
15वीं वित्त
आयोग अवधि के दौरान, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तीन
स्तंभों के अंतर्गत केंद्रीकृत प्रायोजित योजनाओं को लागू करता है, अर्थात्
(i)
महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति,
(ii)
पोषण और स्वास्थ्य संकेतकों में
सुधार के लिए सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, और
(iii)
कठिन परिस्थितियों में बच्चों के
संरक्षण और कल्याण के लिए मिशन वात्सल्य।
मिशन
शक्ति का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और
सशक्तिकरण के लिए हस्तक्षेपों को सुदृढ़ करना है, और यह दो
स्तंभों में विभक्त है। सुरक्षा और संरक्षा के लिए संबल, तथा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सामर्थ्य।
संबल स्तंभ के अंतर्गत, वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही
छत के नीचे समेकित सहायता और समर्थन प्रदान करता है, चाहे वे
निजी या सार्वजनिक स्थानों में हों। यह केंद्र आवश्यकतानुसार महिलाओं को
चिकित्सकीय सहायता, कानूनी सहायता और परामर्श, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श
जैसी सेवाएँ प्रदान करता है। यह योजना मांग आधारित है। मिशन शक्ति के
दिशानिर्देशों के अनुसार, केंद्र सरकार संबल उप-योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित
प्रदेशों को 100% वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
मिशन शक्ति’-
व्यापक
‘मिशन शक्ति’ के तहत पहले की ‘स्वाधार गृह’ (कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं
के लिए) और ‘उज्ज्वला होम’ (मानव तस्करी की शिकार महिलाओं के लिए) योजनाओं को
मिलाकर ‘शक्ति सदन योजना’ के रूप में एकीकृत कर दिया गया है। यह योजना संकटग्रस्त
महिलाओं,
जिनमें तस्करी की गई महिलाएँ भी शामिल हैं, के
लिए एक समग्र राहत एवं पुनर्वास गृह प्रदान करती है। इसका उद्देश्य संकटग्रस्त
महिलाओं के लिए सुरक्षित और समर्थ वातावरण तैयार करना है, जिससे वे कठिन परिस्थितियों से
उबर सकें। शक्ति सदन के निवासियों को, संबंधित विभागों के
साथ समन्वय के ज़रिए, आश्रय, भोजन, वस्त्र, परामर्श, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएँ और अन्य दैनिक
आवश्यकताएँ, व्यावसायिक प्रशिक्षण, बैंक
खाता खोलने की सुविधा, सामाजिक सुरक्षा लाभ आदि प्रदान किए
जाते हैं। यह योजना मांग आधारित केंद्रीकृत प्रायोजित योजना है, जिसके तहत धनराशि सीधे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को योजना के
कार्यान्वयन के लिए जारी की जाती है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी स्थानीय
आवश्यकताओं के अनुसार अपनी आवश्यकताओं का आकलन करते हैं और प्रस्तावों को
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ चर्चा के बाद कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड
(पीएबी) द्वारा अनुमोदित किया जाता है। इस योजना के तहत, शक्ति
सदन को किराए के भवनों में चलाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
वर्तमान में, पूरे देश में 413 शक्ति
सदन कार्यरत हैं।
मिशन शक्ति
डैशबोर्ड
संकटग्रस्त
महिलाओं को राहत और पुनर्वास सेवाओं की डिलीवरी में पारदर्शिता और सुलभता को
सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 22.01.2025 को मिशन शक्ति डैशबोर्ड लॉन्च किया (https://missionshakti.wcd.gov.in/)। अब मिशन शक्ति डैशबोर्ड का डेटा मिशन शक्ति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम
से बहुभाषी सुविधा के साथ उपलब्ध है, जिससे उपयोगकर्ताओं के
लिए पहुंच और सुविधा का दायरा बढ़ गया है। ये सुधार बिल्कुल अंतिम छोर तक
कनेक्टिविटी मजबूत करने, पहुँच में आसानी बढ़ाने और महिलाओं
को सुरक्षा एवं समर्थन के लिए डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा
में महत्वपूर्ण कदम हैं। एक नई सुविधा भी जोड़ी गई है, जिसके
तहत संकटग्रस्त महिला अब अपने निकटतम वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) के साथ पोर्टल और
मोबाइल एप्लिकेशन, दोनों के माध्यम से अपॉइंटमेंट बुक कर
सकती है। मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से निकटतम ओएससी का स्थान आसानी से पहचाना जा
सकता है, जिससे समय पर सहायता और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच
सुनिश्चित होती है। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने ओएससी के लिए
एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी विकसित की है, जो
समन्वित सर्वाइवर-केंद्रित संचालन और प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती
है, जिससे संकटग्रस्त महिलाओं के लिए समान समर्थन सुनिश्चित
किया जा सके, सभी ओएससी में सेवा वितरण को मानकीकृत करने के
स्पष्ट और संगत दिशानिर्देश स्थापित किए जा सकें, और सभी
हितधारकों, जैसे ओएससी कर्मी, स्वास्थ्य
पेशेवर, पुलिस, वकील और कानूनी सहायता
प्रदाता की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को परिभाषित किया जा सके। वन स्टॉप सेंटर की
मानक संचालन प्रक्रिया मिशन शक्ति डैशबोर्ड पर उपलब्ध है
घरेलू हिंसा
से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005
इसके अतिरिक्त, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत सुरक्षा अधिकारी (पीओ) की सार्वजनिक
रूप से सुलभ सूची अब डैशबोर्ड पर उपलब्ध है। 09.02.2026 तक,
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 2,431 से
अधिक पीओ का विवरण अपडेट किया है। इसके अतिरिक्त, डैशबोर्ड
पर विभिन्न योजनाओं के नोडल अधिकारियों की अपडेटिड सूचियाँ भी उपलब्ध हैं, जिनमें वन स्टॉप सेंटर (ओएससी), महिला हेल्पलाइन
(डब्ल्यूएचएल), शक्ति सदन, सखी निवास
आदि भी शामिल हैं।
यह पोर्टल
सभी प्रमुख हेल्पलाइन नंबरों को एकीकृत करता है, जिससे जनता के लिए आसान पहुँच सुनिश्चित हो:
·
महिला हेल्पलाइन (181),
·
नालसा कानूनी सहायता (15100),
·
बाल हेल्पलाइन (1098),
·
आपातकालीन प्रतिक्रिया समर्थन प्रणाली
(112),
·
राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930)
·
टेली मानस (14416)।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 11 नवम्बर, 2024 के पत्र के माध्यम से सभी
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इस बात के लिए अपनी मंज़ूरी दी कि संकटग्रस्त
महिला के ठहरने की अवधि प्रारंभिक पांच दिनों से अधिक बढ़ाई जा सकती है और आवश्यक
वस्तुओं जैसे व्हीलचेयर, स्ट्रेचर और अतिरिक्त बिस्तर की
व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, वन स्टॉप सेंटर (ओएससी)
वर्तमान में अधिकतम 5 दिनों के लिए अस्थायी आश्रय प्रदान
करते हैं, कुछ विशिष्ट मामलों में जहाँ शक्ति सदन में
स्थानांतरण संभव नहीं है, वहाँ लंबी अवधि के लिए ठहरने की
आवश्यकता हो सकती है। ऐसे मामलों में, केंद्र के संचालकों को
परिस्थिति के आधार पर अपने विवेकानुसार ठहरने की अवधि को बढ़ाकर 10 दिन तक करने का अधिकार प्रदान किया गया है। 10
दिनों से अधिक के किसी भी विस्तार के लिए, जिला नोडल अधिकारी
(डीएनओ)/ जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) को ही और 10 दिनों
के अतिरिक्त निवास की अनुमति देने का अधिकार दिया गया है, जिससे
आवश्यक सेवाओं तक पीड़ितों की निरंतर पहुँच सुनिश्चित हो सके। राज्यों/केंद्र
शासित प्रदेशों को यह भी सूचित किया गया है कि यदि आवश्यकता हो तो वे किसी जिले
में एक से अधिक ओएससी की स्थापना का अनुरोध कर सकते हैं।
यह जानकारी
आज राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सवित्री ठाकुर द्वारा
एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।
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पीके/केसी/पीके/एसएसप्रविष्टि तिथि: 11 FEB 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2226591)
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