सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सरकार महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस संबंध में विभिन्न हस्तक्षेप किए गए हैं


 “पुलिस” और “सार्वजनिक व्यवस्था” भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य के विषय हैं। तदनुसार, कानून और व्यवस्था बनाए रखने, मामलों की जांच, अभियोजन तथा दोषसिद्धि और महिलाओं तथा बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में अभियोजन, जिनमें महिलाओं की घरेलू हिंसा से सुरक्षा भी शामिल है, की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन पर है; ये ऐसे अपराधों/आपराधिक कृत्यों से निपटने में सक्षम हैं।

हालांकि, केंद्रीय सरकार महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस संबंध में विभिन्न हस्तक्षेप किए हैं, जिनमें घरेलू हिंसा की शिकार/सर्वाइवर महिलाओं को समर्थन प्रदान करने के उपाय भी शामिल हैं।

15वीं वित्त आयोग अवधि के दौरान, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तीन स्तंभों के अंतर्गत केंद्रीकृत प्रायोजित योजनाओं को लागू करता है, अर्थात्

(i)           महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति,

(ii)          पोषण और स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिए सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, और

(iii)         कठिन परिस्थितियों में बच्चों के संरक्षण और कल्याण के लिए मिशन वात्सल्य।

मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए हस्तक्षेपों को सुदृढ़ करना है, और यह दो स्तंभों में विभक्त है। सुरक्षा और संरक्षा के लिए संबल, तथा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सामर्थ्य।

 संबल स्तंभ के अंतर्गत, वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे समेकित सहायता और समर्थन प्रदान करता है, चाहे वे निजी या सार्वजनिक स्थानों में हों। यह केंद्र आवश्यकतानुसार महिलाओं को चिकित्सकीय सहायता, कानूनी सहायता और परामर्श, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएँ प्रदान करता है। यह योजना मांग आधारित है। मिशन शक्ति के दिशानिर्देशों के अनुसार, केंद्र सरकार  संबल उप-योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100% वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) के सुचारु संचालन के लिए देश भर में पर्याप्त कर्मचारी और अवसंरचनात्मक समर्थन प्रदान किया गया है। हालांकि, मिशन शक्ति के अंतर्गत सभी योजनाओं का कार्यान्वयन संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की जिम्मेदारी है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को धनराशि वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग द्वारा निर्दिष्ट प्रक्रिया के अनुसार जारी की जाती है, जिसमें सिंगल नोडल एजेंसी (एसएनए) या एसएनए स्पर्श (SPARSH) के माध्यम से सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) शामिल है। इसके अतिरिक्त, वर्ष में एक बार, कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ योजना के अंतर्गत गतिविधियों की प्रगति की निगरानी करता है तथा उद्देश्यों की प्राप्ति और ग्रामीण एवं सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों सहित महिलाओं और बच्चों को सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करता है। इसके अलावा, मंत्रालय के अधिकारी समय-समय पर बैठकों, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के क्षेत्रीय दौरों के माध्यम से योजना की निरंतर समीक्षा करते हैं। 09.02.2026 तक, पूरे देश में कुल 896 वन स्टॉप सेंटर (जिसमें गुजरात के 35 वन स्टॉप सेंटर शामिल हैं) कार्यरत हैं। 1 अप्रैल, 2015 को हुई शुरुआत  से लेकर 30 सितंबर, 2025 तक, वन स्टॉप सेंटर द्वारा 12.67 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की जा चुकी है।

मिशन शक्ति’-

व्‍यापक ‘मिशन शक्ति’ के तहत पहले की ‘स्वाधार गृह’ (कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं के लिए) और ‘उज्ज्वला होम’ (मानव तस्करी की शिकार महिलाओं के लिए) योजनाओं को मिलाकर ‘शक्ति सदन योजना’ के रूप में एकीकृत कर दिया गया है। यह योजना संकटग्रस्त महिलाओं, जिनमें तस्करी की गई महिलाएँ भी शामिल हैं, के लिए एक समग्र राहत एवं पुनर्वास गृह प्रदान करती है। इसका उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं के लिए सुरक्षित और समर्थ वातावरण तैयार करना है,  जिससे वे कठिन परिस्थितियों से उबर सकें। शक्ति सदन के निवासियों को, संबंधित विभागों के साथ समन्वय के ज़रिए,  आश्रय, भोजन, वस्त्र, परामर्श, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएँ और अन्य दैनिक आवश्यकताएँ, व्यावसायिक प्रशिक्षण, बैंक खाता खोलने की सुविधा, सामाजिक सुरक्षा लाभ आदि प्रदान किए जाते हैं। यह योजना मांग आधारित केंद्रीकृत प्रायोजित योजना है, जिसके तहत धनराशि सीधे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को योजना के कार्यान्वयन के लिए जारी की जाती है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अपनी आवश्यकताओं का आकलन करते हैं और प्रस्तावों को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ चर्चा के बाद कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) द्वारा अनुमोदित किया जाता है। इस योजना के तहत, शक्ति सदन को किराए के भवनों में चलाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वर्तमान में, पूरे देश में 413 शक्ति सदन कार्यरत हैं।

मिशन शक्ति डैशबोर्ड

संकटग्रस्त महिलाओं को राहत और पुनर्वास सेवाओं की डिलीवरी में पारदर्शिता और सुलभता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 22.01.2025 को मिशन शक्ति डैशबोर्ड लॉन्च किया (https://missionshakti.wcd.gov.in/)। अब मिशन शक्ति डैशबोर्ड का डेटा मिशन शक्ति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से बहुभाषी सुविधा के साथ उपलब्ध है, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए पहुंच और सुविधा का दायरा बढ़ गया है। ये सुधार बिल्‍कुल अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी मजबूत करने, पहुँच में आसानी बढ़ाने और महिलाओं को सुरक्षा एवं समर्थन के लिए डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। एक नई सुविधा भी जोड़ी गई है, जिसके तहत संकटग्रस्त महिला अब अपने निकटतम वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) के साथ पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन, दोनों के माध्यम से अपॉइंटमेंट बुक कर सकती है। मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से निकटतम ओएससी का स्थान आसानी से पहचाना जा सकता है, जिससे समय पर सहायता और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित होती है। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने ओएससी के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी विकसित की है, जो समन्वित सर्वाइवर-केंद्रित संचालन और प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है, जिससे संकटग्रस्त महिलाओं के लिए समान समर्थन सुनिश्चित किया जा सके, सभी ओएससी में सेवा वितरण को मानकीकृत करने के स्पष्ट और संगत दिशानिर्देश स्थापित किए जा सकें, और सभी हितधारकों, जैसे ओएससी कर्मी, स्वास्थ्य पेशेवर, पुलिस, वकील और कानूनी सहायता प्रदाता की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को परिभाषित किया जा सके। वन स्टॉप सेंटर की मानक संचालन प्रक्रिया मिशन शक्ति डैशबोर्ड पर उपलब्‍ध है

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 

इसके अतिरिक्त, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005  के अंतर्गत सुरक्षा अधिकारी (पीओ) की सार्वजनिक रूप से सुलभ सूची अब डैशबोर्ड पर उपलब्ध है। 09.02.2026 तक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 2,431 से अधिक पीओ का विवरण अपडेट किया है। इसके अतिरिक्त, डैशबोर्ड पर विभिन्न योजनाओं के नोडल अधिकारियों की अपडेटिड सूचियाँ भी उपलब्ध हैं, जिनमें वन स्टॉप सेंटर (ओएससी), महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल), शक्ति सदन, सखी निवास आदि भी शामिल हैं।

यह पोर्टल सभी प्रमुख हेल्पलाइन नंबरों को एकीकृत करता है, जिससे जनता के लिए आसान पहुँच सुनिश्चित हो:

·        महिला हेल्पलाइन (181),

·        नालसा कानूनी सहायता (15100),

·        बाल हेल्पलाइन (1098),

·        आपातकालीन प्रतिक्रिया समर्थन प्रणाली (112),

·        राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930)

·        टेली मानस (14416)

 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 11 नवम्बर, 2024 के पत्र के माध्यम से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इस बात के लिए अपनी मंज़ूरी दी कि संकटग्रस्त महिला के ठहरने की अवधि प्रारंभिक पांच दिनों से अधिक बढ़ाई जा सकती है और आवश्यक वस्तुओं जैसे व्हीलचेयर, स्ट्रेचर और अतिरिक्त बिस्तर की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) वर्तमान में अधिकतम 5 दिनों के लिए अस्थायी आश्रय प्रदान करते हैं, कुछ विशिष्ट मामलों में जहाँ शक्ति सदन में स्थानांतरण संभव नहीं है, वहाँ लंबी अवधि के लिए ठहरने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे मामलों में, केंद्र के संचालकों को परिस्थिति के आधार पर अपने विवेकानुसार ठहरने की अवधि को बढ़ाकर 10 दिन तक करने का अधिकार प्रदान किया गया है। 10 दिनों से अधिक के किसी भी विस्तार के लिए, जिला नोडल अधिकारी (डीएनओ)/ जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) को ही और 10 दिनों के अतिरिक्त निवास की अनुमति देने का अधिकार दिया गया है, जिससे आवश्यक सेवाओं तक पीड़ितों की निरंतर पहुँच सुनिश्चित हो सके। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सूचित किया गया है कि यदि आवश्यकता हो तो वे किसी जिले में एक से अधिक ओएससी की स्थापना का अनुरोध कर सकते हैं।

यह जानकारी आज राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सवित्री ठाकुर द्वारा एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।

****

पीके/केसी/पीके/एसएसप्रविष्टि तिथि: 11 FEB 2026 by PIB Delhi (रिलीज़ आईडी: 2226591) आगंतुक पटल : 91

अगर आप महिला अधिकार और सुरक्षा के विषयों पर अपना योगदान देना चाहते है डेली अपडेट हेतु फ़ॉलोअर बनिए

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, प्रतिबंध आणि निवारण) कायदा २०१३ या कायदानुसार, कामाच्या ठिकाणी लैंगिक छळ म्हणजे काय?

  जर हा प्रश्न तुमच्यासमोर असेल तर खालील माहिती तुमच्यासाठी आहे… सुरक्षित आणि गरिमापूर्ण वातावरण असणारे  कामाचे  ठिकाण असे असायला हवे कि ,ज्यामध्ये लैंगिक छळ थांबवन्यास कायदेशीर व्यवस्था असेल  आणि कामाच्या ठिकाणावर काम करनारया सर्व लोकानाही माहित असयाला हवे की अनिष्ट कृत्य किंवा वर्तन कोणते आहेत कामाची ठिकाणे लैंगिक छळापासून मुक्त राहावीत आणि महिलांना सुरक्षित आणि सुरक्षित वातावरण मिळावे यासाठी हा कायदा तयार करण्यात आला आहे . कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, प्रतिबंध आणि निवारण) कायदा , २०१३ या कायदानुसार, कामाच्या ठिकाणी लैंगिक छळ म्हणजे काय? लैंगिक छळ म्हणजे  खाली नमूद केलेली थेट अथवा गर्भितार्थ कृती किंवा वागणूक लैंगिक छळ हे जे कि , कोणतेही अनिष्ट कृत्य किंवा वर्तन आहे (मग ती व्यक्त किंवा निहित), जसे :- शारीरिक संपर्क किंवा आगाऊ  लैंगिक अनुकूलतेसाठी मागणी किंवा विनंती  लैंगिक रंगीत टिप्पणी करणे  पोर्नोग्राफी दाखवत आहे  लैंगिक स्वभावाचे इतर कोणतेही शारीरिक, शाब्दिक किंवा गैर-मौखिक असे आचरण. लैंगिक अर्थाच्या टिप्पणी कामाच्या ठिक...

महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए कि गई प्रमुख पहलों की जानकारी

  Mission Shakti  महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा कि गई प्रमुख पहलों की जानकारी भारत देश में महिला सशक्तिकरण की नई परिभाषा महिलाओं का सशक्तिकरण यह एक परिवर्तनकारी प्रक्रिया है,   जो महिलाओं को आर्थिक , सांस्कृतिक , सामाजिक /   राजनीतिक जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्राप्त हों , यह सुनिश्चित करती है। यह न केवल महिलाओं की व्यक्तिगत क्षमता को ही बढ़ाता है , बल्कि सामाजिक प्रगति में भी योगदान देता है। भारत देश ने महिलाओं को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है , उनकी सुरक्षा , आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक समावेश पर ध्यान केंद्रित किया है। यह दस्तावेज़ महिला सशक्तिकरण में भारत की प्रगति को आगे बढ़ाने वाले कुछ प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है , जो एक अधिक न्यायसंगत और समावेशी समाज बनाने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। मिशन शक्ति मंत्रालय ने १५ वें वित्त आयोग की अवधि 2021-22 से 2025-26 के दौरान महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक ...

महिलाओं की व्यवहारिक सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करवाने के लिए शासन ने नियम कानून बना दिया है और प्रत्येक कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत समिति का अनिवार्यतः गठन करने का निर्देश भी जारी कर दिया है... आप भी इस समिति की अधिकृत सदस्य बन सकती है पढ़िए कैसे...

शासकीय कार्यालयों के आंतरिक शिकायत समिति के बाहरी सदस्य बनिए और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाकर महिला शक्तिकरण के लिए अग्रणी भूमिका निभाईये... आंतरिक शिकायत समिति का महत्व आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से मुक्त, सुरक्षित और भय-रहित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत गठित की जाती है। आंतरिक शिकायत समिति के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु: 1. महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण: आईसीसी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। यह महिलाओं को डर और भय के बिना काम करने का माहौल प्रदान करती है। 2. यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निवार ण: आईसीसी यौन उत्पीड़न की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष तरीके से निवारण करती है। यह शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को सुनवाई का अवसर प्रदान करती है। 3. यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता: आईसीसी यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता बनाए रखती है। यह शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी को गुप्त रखती है। 4. ज...

वन स्टॉप सेंटर - यह घरेलू और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को हिंसा और संकट से निपटने के लिए एक ही छत के नीचे एकीकृत सहयोग और सहायता प्रदान करता है।

  वन स्टॉप सेंटर - वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) यह   मिशन शक्ति के अंतर्गत चलाए जा रही संबल पहल का घटक है।   वन स्टॉप सेंटर घरेलू और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को हिंसा और संकट से निपटने के लिए एक ही छत के नीचे एकीकृत सहयोग और सहायता प्रदान करता है। वन स्टॉप सेंटर जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता , कानूनी सहायता और सलाह , अस्थायी आश्रय , पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करता है। देश भर में संचालित ८०२   वन स्टॉप सेंटर से दस  लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली - आज की तारीख में , स्वीकृत 878 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) में से , देश भर में 802 ओएससी चालू हैं और इनमें 31 अक्टूबर , 2024 तक 10.12 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा , शक्ति सदन मिशन शक्ति के तहत सामर्थ्य पहल का यह एक घटक है। यह तस्करी करके लाई गई महिलाओं सहित संकटग्रस्त सभी महिलाओं के लिए एकीकृत राहत व  पुनर्वास गृह है।   वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) का   उद्देश्य यह है कि संकट की स्थिति में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सक्षम वातावरण बन...

कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा… एक गंभीर विषय है गौरतलब रहे की इस ज्वलंत विषय पर सभी शिकायत तो करते हैं लेकिन अपनी नागरिक जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं इसलिए जानिए महिला सुरक्षा को लेकर क्या है आपकी नागरिक जिम्मेदारी…

भारत में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा एक ज्वलंत विषय है। कामकाजी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में होती गुणात्मक वृद्धि के साथ, यह चिंता बढ़ रही है कि. कार्यस्थल में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यहां कुछ मुख्य मुद्दे दिए गए हैं: यौन उत्पीड़न:   यह एक गंभीर समस्या है, जिसमें महिलाओं को अवांछित टिप्पणी, छूना, या यौन संबंध बनाने के लिए दबाव सहना पड़ता है। भेदभाव:   महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन, कम पदोन्नति के अवसर और कम सुविधाएं मिल सकती हैं। असुरक्षित कार्य वातावरण:   कुछ कार्यस्थलों में महिलाओं को असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि खराब रोशनी, अपर्याप्त सुरक्षा उपाय, और लंबे समय तक काम करना। गौरतलब रहे कि, आप भी शासकीय तंत्र का हिस्सा बनकर महिला सुरक्षा के लिए अधिकृत संरक्षक की भूमिका निभा सकते हैं  इस लिंक पर है पूरी जानकारी क्लिक करिए  आप सूचना का अधिकार प्रयोग कर महिला सुरक्षा सुनिश्चित करवा सकते हैं उल्लेखनीय है की आप इस लिंक से सूचना का अधिकार आवेदन कॉपी कर करके सभी शासकीय कार्यालयों के मुखिया को सबक सिखा सकते हैं  RTI आवेदन कॉ...

किलकारी योजना मोबाइल-आधारित सेवा है, जो गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को सीधे गर्भावस्था, प्रसव और शिशु देखभाल के बारे में संदेश देकर उन्हें नवजात शिशु की देखभाल हेतु स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह एक ध्वनि-आधारित सेवा है और इसलिए ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों के बाद भी सहायता करने में सक्षम है

  किलकारी योजना पर अपडेट प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर जितनी भी महिलाए पंजीकृत हुई है , उन  महिलाओं को किलकारी योजना के माध्यम से संवादात्मक ध्वनि प्रतिक्रिया के जरिये गर्भावस्था , प्रसव और बच्चे की देखभाल के बारे में मुफ्त व साप्ताहिक अंतराल में समय-समय पर आवश्यक श्रव्य संदेश दिए जाते हैं,  और किलकारी योजना वर्तमान में २०   राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है गर्भवती माताओं के लिए  किलकारी कार्यक्रम १५   जनवरी , २०१६  को डिजिटल इंडिया पहल के एक भाग के रूप में यह एक नई मोबाइल-आधारित सेवा है , जो गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य इन सभी लाभार्थियों को यानी सभी पंजीकृत महिलाओं को  सीधे गर्भावस्था , प्रसव और शिशु देखभाल के बारे में संदेश देकर उन्हें नवजात शिशु की देखभाल हेतु स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह सेवा  ध्वनि-आधारित सेवा है और इसलिए यह सेवा ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों के बाद भी सहायता करने में सक्षम है। प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकृ...

उज्ज्वल भविष्य के लिए बालिकाओं को सशक्त बनाना

  अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस   उज्ज्वल भविष्य के लिए बालिकाओं को सशक्त बनाना - हर साल ११ अक्टूबर को मनाये जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस, दुनिया भर में बालिकाओं को सशक्त बनाने व उनकी सुरक्षा करने की जरूरत को पुरजोर तरीके से याद दिलाता है , यह दिन बालिकाओं के लिए लैंगिक समानता , शिक्षा और अवसरों के जैसे महत्त्व पर प्रकाश डालता है । अधिक   जानकारी   के   लिए   यहां  पर  क्लिक   करें :-   अंतर्राष्ट्रीय   बालिका   दिवस अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस ****  

छत्तीसगढ़ की सशक्त समाजसेवी महिलाओं को जानकारी उपलब्ध करवाने वाले डिजिटल मंच पर प्रकाशित की गई है सारी जानकारी.............. जानिये कैसे आप भी बन सकती है स्कुल, कॉलेज, अस्पताल, उद्योग, शासकीय कार्यालयों जैसे संस्थान के आंतरिक परिवाद समिति की सदस्य ........................................................ पढ़िए और जानिए एक सशक्त महिला होने का अवसर आपके पास भी कैसे है ! ................................... उम्र, शैक्षणिक योग्यता, राजनैतिक पद जैसे विषय आपको अपनी सशक्त प्रशासनिक भूमिका बनाने से रोक नहीं सकते हैं .................................. क्योकि महिलाओं के मुद्दों को दृढ़ता से रखने की सक्षमता रखने वाली महिला को आतंरिक परिवाद समिति का सदस्य बनाया जाता है .... नीचे लिखी है पूरी जानकारी 👇👇👇

  पहल करिये आंतरिक परिवाद समिति का गठन करवाने के लिए पहल करिये यदि आप कामकाजी महिला है तो अपने कार्यालय में इस समिति का गठन करवाईये और यदि कामकाजी महिला नहीं हैं तो अपने आस पास के कार्यस्थलों में आंतरिक परिवाद समिति बनवाने के लिए पहल करिए जानकारी मांगिये आपकी सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करवाना अब आपके हाथों में है क्योंकि महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम , 2013 आपको यह अधिकार प्रदान करता है की आप जिस भी कार्यक्षेत्र में जायेंगे वहां आपको उस कार्यक्षेत्र की आंतरिक परिवाद समिति का संरक्षण मिले इसलिए सभी कार्यस्थलों से आंतरिक परिवाद समिति गठन की जानकारी मांगिये |   भागीदारी दीजिए जिन कार्यस्थलों के नियोक्ताओं ने स्वविवेक से अपने कार्यस्थल पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया है उन कार्यस्थलों के कामकाजी माहौल को गरिमापूर्ण बनाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करिए और इस विषय की जानकारी को साझा करने का माध्यम बनिए । प्रश्न पुछिये ? जिन कार्यस्थलों पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन नही किया गया है ऐसे कार्यस्थलों के नियोक्ता...

एनटीपीसी ने बालिका सशक्तिकरण मिशन के नए संस्करण का शुभारंभ किया है, यह कार्यक्रम भारत सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पहल के अनुरूप है और इसका उद्देश्य लड़कियों की कल्पनाओं को पोषित करके और अवसरों का पता लगाने की उनकी क्षमता को बढ़ावा देकर लैंगिक असमानता को मिटाना है।

 बालिका सशक्तिकरण मिशन   बालिका सशक्तिकरण मिशन (जीईएम) का नया संस्करण लॉन्च करने की तैयारी भारत की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड अपनी प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी पहल, कर रही है।बालिका सशक्तिकरण मिशन यह कार्यक्रम भारत सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पहल के अनुरूप है व  इसका उद्देश्य यह है कि ,लड़कियों की कल्पनाओं को पोषित करके और उनके अवसरों का पता लगाने की उनकी क्षमता को बढ़ावा देकर लैंगिक असमानता को मिटाना है। बालिका सशक्तिकरण मिशन गर्मी की छुट्टियों के दौरान युवा लड़कियों के लिए पूर्ण १  महीने की कार्यशाला आयोजित कि जाती है और  उसके माध्यम से लड़कियों को  उनके सर्वांगीण उत्थान और विकास के लिए एक मंच प्रदान करता है। जीईएम का यह नया संस्करण अप्रैल 2024 से शुरू हुआ ,और  अब  यह नया संस्करण बिजली क्षेत्र के पीएसयू के 42 चिन्हित स्थानों पर समाज के वंचित वर्गों के लगभग ३,000 मेधावी बच्चों को जोड़ेगा। इसके साथ साथ ही इस  बालिका सशक्तिकरण मिशन से लाभान्वित होने वाले बच्चों की कुल संख्या १०,000 से अधिक हो जाएगी। २०१८  ...

कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ एक बड़ा कदम

विगत दिंनाक २ सितंबर २०२४ को केंद्र सरकार द्वारा महिला सुरक्षा एवं गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए नियम , कानून को सशक्त बनाया गया है और व्यथित महिलाओंको शिकायत दर्ज कराने के लिए SHe Box शी-बॉक्स नामक इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था स्थापित की गई है , जिसका सह–विस्तार विवरण अग्रलिखित है :  सभी   कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करना ! देश में हर एक कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने  केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवीजी  के नेतृत्व में २९ अगस्त २०२४ को आयोजित एक कार्यक्रम में नया शी-बॉक्स पोर्टल लॉन्च किया है। इस केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के पंजीकरण और निगरानी को कारगर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित इस लॉन्च कार्यक्रम में मंत्रालय की नई वेबसाइट का भी अनावरण किया गया। इन दोनों से ही सरकार की जनता के साथ डिजिटल सहभागिता बढ़ने की उम्मीद है।   केंद्रीय मंत्री ने लॉन्च किया शी-बॉक्स पोर्टल कार्यस्थल पर उत्पीड़न के खिलाफ एक ...