महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, अधिक समावेशी डिजिटल भारत का निर्माण , सभी महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ डिजिटल हिंसा को समाप्त करने के लिए एकजुट होना" है
महिलाओं
के खिलाफ हिंसा उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस
मुख्य विशेषताएं
· राष्ट्रीय
महिला आयोग (NCW) की स्थापना जनवरी 1992
में हुई थी। यही आयोग भारत में महिलाओं के हितों की रक्षा और
महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष राष्ट्रीय वैधानिक निकाय है।
· घरेलू
हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम,
2005 (पीडब्ल्यूडीवीए), और कार्यस्थल पर महिलाओं
का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण)
अधिनियम, 2013 जैसे मजबूत कानूनी ढांचे लागू किए
गए हैं।
· सरकार
समर्थित योजनाएं जैसे मिशन शक्ति,
वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन
(181), और स्वाधार गृह संकट में महिलाओं के लिए एकीकृत सहायता प्रदान
करती हैं।
· प्रौद्योगिकी-सक्षम
प्लेटफ़ॉर्म जैसे- शी-बॉक्स और महिला सहायता डेस्क रिपोर्टिंग और समय पर न्याय तक पहुंच में सुधार
करते हैं।
प्रस्तावना
25 नवंबर- महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के
लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस - विश्व स्तर पर गहरी छाप छोड़ता है। सरकारें, अंतर्राष्ट्रीय निकाय और नागरिक समाज संगठन मजबूत कानूनों और वैश्विक
अभियानों के माध्यम से महिलाओं के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के प्रयास
तेज कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने,
लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं और युवा लड़कियों के सामने
मौजूद गहरी सामाजिक और डिजिटल चुनौतियों का समाधान करने के लिए अपने कानूनी
ढांचे को लगातार मजबूत किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2000 में चुना गया यह दिन 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक 16 दिन के लिए लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ विश्व में सक्रियता की शुरुआत का प्रतीक है । वर्ष 2025 के लिए, विषय है "सभी महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ डिजिटल हिंसा को समाप्त करने के लिए एकजुट होना" है। ऑनलाइन उत्पीड़न और साइबरस्टॉकिंग से लेकर डीपफेक, साइबरस्टॉकिंग, डॉक्सिंग और समन्वित रूप से स्त्रियों पर हमलों तक, प्रौद्योगिकी-सुविधा प्राप्त लिंग-आधारित हिंसा करने वालों के लिए नए रूप के रूप में उभरी है।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा समाप्त करने के लिए भारत की लड़ाई: कानून और विधान
भारत सरकार ने मजबूत कानूनी ढांचे, संस्थागत समर्थन, समर्पित हेल्पलाइन और
प्रमुख योजनाओं
को शामिल करते हुए बहु-आयामी दृष्टिकोण
के माध्यम
से महिलाओं
के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन को प्राथमिकता दी है। ये प्रयास महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन
के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (25 नवंबर) के पालन के साथ संरेखित हैं, जिसमें न केवल
तत्काल निवारण
बल्कि दीर्घकालिक
सशक्तिकरण पर
भी जोर दिया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) मिशन शक्ति योजना के अंतर्गत सुरक्षा
(संबल) और सशक्तिकरण (सामर्थ्य) घटकों को एकीकृत करते हुए इन पहलों का नेतृत्व करता है।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू)
इस आयोग की
स्थापना 31 जनवरी 1992 को
भारत सरकार द्वारा एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं के
लिए सभी संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों की जांच और निगरानी करना, जहां भी आवश्यक हो मौजूदा कानूनों में संशोधन की सिफारिश करना और महिलाओं के
अधिकारों से वंचित होने से संबंधित शिकायतों की जांच करना था। समानांतर जिम्मेदारियों
के साथ अधिकांश राज्यों ने राज्य महिला आयोग (एससीडब्ल्यू) का भी गठन किया है। एनसीडब्ल्यू
अपने पोर्टल www.ncw.nic.in के माध्यम से महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें लिखित
और ऑनलाइन दोनों रूप में प्राप्त करता है और त्वरित तथा प्रभावी निवारण सुनिश्चित करने
के लिए सक्रिय रूप से उन पर कार्रवाई करता है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय महिला आयोग
(एनसीडब्ल्यू) ने घरेलू हिंसा की घटनाओं की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू किए
हैं। ऐसा ही एक हेल्पलाइन नंबर 7827170170 है, जो पीड़ित महिलाओं को पुलिस, अस्पतालों, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं
आदि के साथ जोड़कर 24x7 ऑनलाइन सहायता प्रदान करता है। यह पोर्टल
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से डिजिटल इंडिया के माध्यम
से इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस (आईवीआर) तंत्र द्वारा संचालित है।
भारतीय न्याय संहिता, 2023:
1 जुलाई, 2024 से प्रभाव में आई, भारतीय न्याय संहिता, 2023 भारतीय दंड संहिता
(आईपीसी) को प्रतिस्थापित करती है और यौन
अपराधों के लिए कठोर दंड की को प्रतिपादित करती है, जिसमें
18 साल से कम उम्र के नाबालिगों के बलात्कार के लिए आजीवन कारावास शामिल
है। यह यौन अपराधों की परिभाषाओं का विस्तार करता है,
पीड़ित के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य
करता है।
घरेलू हिंसा से
महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (पीडब्ल्यूडीवीए):
भारत में, घरेलू हिंसा इस अधिनियम द्वारा शासित होती है। जो "पीड़ित
व्यक्ति" को किसी भी महिला के रूप में परिभाषित करता
है जो प्रतिवादी के साथ घरेलू संबंध में है या रही है।
घरेलू संबंध
का मतलब है कि वे एक घर में एक साथ रहते हैं या रह चुके हैं, और वे विवाह, गोद लेने या पारिवारिक संबंधों
से संबंधित हो सकते हैं। धारा 3 इसे ऐसे किसी भी कार्य के रूप
में परिभाषित करती है जो किसी महिला के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता
है या उसकी सुरक्षा को खतरे में डालता है, जिसमें गैरकानूनी मांगों
के लिए उत्पीड़न भी शामिल है। "घरेलू हिंसा" शब्द में शामिल हैं:
·
शारीरिक शोषण (नुकसान, चोट या धमकी)
·
यौन शोषण (कोई भी गैर-सहमति वाला या अपमानजनक यौन कृत्य)
·
मौखिक/भावनात्मक दुर्व्यवहार (अपमान, धमकी, अपमान)
·
आर्थिक दुरुपयोग
(पैसा रोकना, संसाधनों
तक पहुंच से इनकार करना, संपत्ति का निपटान)
·
दहेज संबंधी
उत्पीड़न
कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम,
2013:
यह अधिनियम
सभी महिलाओं पर लागू होता है, चाहे उनकी
उम्र, नौकरी का प्रकार या कार्य क्षेत्र कुछ भी हो। यह नियोक्ताओं
को 10 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों पर एक आंतरिक समिति
(आईसी) बनाने का आदेश देता है, जबकि उपयुक्त सरकार छोटे संगठनों
या नियोक्ताओं के खिलाफ मामलों के लिए स्थानीय समितियां (एलसी) स्थापित करती है। महिला
एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) कार्यान्वयन और जागरूकता की देखरेख करता है।
शिकायत डेटा को केंद्रीकृत करने के लिए, एमडब्ल्यूसीड ने SHe-Box
लॉन्च किया, जो मामलों की रिपोर्टिंग और ट्रैकिंग
के लिए एक पोर्टल है, जिसमें अधिनियम के तहत पूछताछ 90
दिनों के भीतर पूरी की जानी आवश्यक है।
मिशन शक्ति
मिशन शक्ति
एक एकीकृत, मिशन-मोड योजना है जिसे महिलाओं की सुरक्षा,
सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। यह महिलाओं
के पूरे जीवन चक्र में आने वाली चुनौतियों से निपटने, मंत्रालयों
में समन्वय को बढ़ावा देने और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं को समान योगदानकर्ता के
रूप में स्थापित करने के लिए नागरिक स्वामित्व को प्रोत्साहित करके सरकार के महिला
नेतृत्व वाले विकास " के दृष्टिकोण को क्रियान्वित
करता है।
'स्वधार गृह
योजना' के अंतर्गत आश्रय गृह
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 01 अप्रैल, 2016 से संशोधित स्वाधार गृह योजना लागू कर रहा है। यह योजना विषम परिस्थितियों जैसे पारिवारिक झगड़ों, अपराध, हिंसा, मानसिक तनाव, सामाजिक बहिष्कार के कारण बेघर महिलाओं और लड़कियों के साथ-साथ वेश्यावृत्ति में मजबूर होने के जोखिम वाली महिलाओं और लड़कियों की प्राथमिक जरूरतों को पूरा करती है। आश्रय, भोजन, कपड़े, परामर्श, प्रशिक्षण, नैदानिक और कानूनी सहायता के प्रावधानों के माध्यम से इस योजना का लक्ष्य ऐसी महिलाओं को आर्थिक और भावनात्मक रूप से कठिन परिस्थितियों में पुनर्वास करना है।
वन स्टॉप सेंटर
महिला एवं
बाल विकास मंत्रालय ने 01 अप्रैल, 2015 से वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) योजना भी लागू की है। ये ओएससी हिंसा से प्रभावित
या पीड़ित महिलाओं को पुलिस, चिकित्सा और कानूनी सहायता तथा
परामर्श, मनो-सामाजिक परामर्श और अस्थायी आश्रय सहित एक ही छत
के नीचे कई एकीकृत सेवाएं प्रदान करते हैं। 2015 से जिला स्तर
पर ओएससी की स्थापना ने हिंसा और संकट का सामना करने वाली महिलाओं को समय पर समर्थन
और सहायता के लिए एक समर्पित मंच प्रदान किया है, जो पहले मौजूद
अंतर को भरता है।
स्त्री मनोरक्षा
महिला और बाल
विकास मंत्रालय ने हिंसा और संकट का सामना
करने वाली महिलाओं का समर्थन करने के लिए मनो-सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की
जरूरतों को पूरा करने के लिए देश भर में वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारियों को 'स्त्री मनोरक्षा' परियोजना के तहत बुनियादी
और उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए बेंगलुरु में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य
और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहंस) की सेवाएं ली हैं।
डिजिटल शक्ति अभियान
राष्ट्रीय महिला आयोग डिजिटल शक्ति अभियान को लागू कर रहा है। यह एक अखिल भारतीय परियोजना जिसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों को डिजिटल रूप से सशक्त और कुशल बनाना है। सुरक्षित ऑनलाइन स्थान बनाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, डिजिटल शक्ति महिलाओं को खुद की सुरक्षा करने और ऑनलाइन अवैध या अनुचित गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आवश्यक कौशल और जागरूकता प्रदान करती है।
राष्ट्रीय घरेलू हिंसा हेल्पलाइन
भारत सरकार
ने किसी भी प्रकार की हिंसा या संकट का सामना करने वाली महिलाओं को 24x7 आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता प्रदान करने के उद्देश्य
से 01 अप्रैल, 2015 को महिला हेल्पलाइन
(डब्ल्यूएचएल) योजना का सार्वभौमिकरण शुरू किया। यह योजना एक टोल-फ्री नंबर 181 के माध्यम से राष्ट्रव्यापी सहायता
प्रदान करती है, जो महिलाओं को एक रेफरल प्रणाली के माध्यम से
सेवाओं से जोड़ती है।
सरकार निर्भया
फंड के अंतर्गत आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ई आर एस एस) भी लागू
करती है। यह एक अखिल भारतीय, एकल,
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नंबर है, यानी, पुलिस, अग्निशमन और एम्बुलेंस
सेवाओं जैसी विभिन्न आपात स्थितियों के लिए 112 आधारित प्रणाली
है, जिसमें संकट के स्थान पर फील्ड संसाधनों को कंप्यूटर सहायता
से भेजा जाता है। इसे 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में क्रियान्वित
किया गया है।
इसके अलावा, एक व्हाट्सएप नंबर 7217735372 को भी
कोविड महामारी लॉकडाउन के दौरान आपातकालीन प्रतिक्रिया के रूप में शुरू किया गया था।
जिन मामलों में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता थी इन महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान
करने के लिए राज्य पुलिस अधिकारियों से टेलीफोन कॉल/ईमेल के माध्यम से भी संपर्क किया
गया था।
संस्थागत तंत्र
सुलभ और अनुकूल
न्याय सुनिश्चित करने के लिए, सरकार
ने रिपोर्टिंग, जांच और निर्णय के लिए विशेष संस्थान स्थापित
किए हैं।
·
फास्ट ट्रैक
विशेष अदालतें (एफटीएससी): निर्भया फंड के अंतर्गत संचालित ये अदालतें बलात्कार और पास्को POCSO
मामलों की सुनवाई में तेजी लाती हैं। अगस्त 2025 तक, 773 एफटीएससी (400 विशेष ई-पॉक्सो अदालतों सहित) 29 राज्यों/केंद्रशासित
प्रदेशों में कार्यरत हैं, जो शुरुआत से 334,213
से अधिक मामलों का निपटान कर रहे हैं।
·
महिला सहायता
डेस्क (डब्ल्यूएचडी): लिंग आधारित हिंसा की संवेदनशील रिपोर्टिंग की सुविधा के लिए पुलिस स्टेशनों
में स्थापित किया गया। फरवरी 2025 तक, 14,658 डब्ल्यूएचडी देशभर
में कार्यरत हैं, जो एफआईआर, परामर्श और
कानूनी सहायता तक पहुंच बढ़ा रहे हैं।
·
शी-बॉक्स पोर्टल : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने शी-बॉक्स पोर्टल शुरू किया है। यह एक एकीकृत
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न
(रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH अधिनियम) के साथ पूरी तरह से संरेखित है। यह एक केंद्रीय रूप से सुलभ डेटाबेस के रूप में कार्य करता है जिसमें देश भर
में सरकारी और निजी क्षेत्र के संगठनों में गठित सभी आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय
समितियों (एलसी) का विवरण शामिल है। पोर्टल महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की
शिकायतें दर्ज करने, वास्तविक समय में उनकी प्रगति को ट्रैक करने
में सक्षम बनाता है, और यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक शिकायत
स्वचालित रूप से संबंधित कार्यस्थल के संबंधित आईसी/एलसी को भेज दी जाए - चाहे वह केंद्रीय
मंत्रालयों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन या निजी
संस्थाओं में हो। इसके अतिरिक्त, यह प्रभावी निगरानी और त्वरित
निवारण की सुविधा के लिए समिति के विवरण और शिकायत की स्थिति को नियमित रूप से अपडेट
करने के लिए प्रत्येक संगठन में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति को अनिवार्य बनाता है।
कानूनी सुधारों और प्रौद्योगिकी के माध्यम से महिला सुरक्षा को मजबूत करना
यौन हिंसा
से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए, भारत सरकार ने आपराधिक कानून (संशोधन)
अधिनियम, 2018 लागू किया, जिसने बलात्कार और संबंधित अपराधों के लिए दंड को सख्त कर दिया गया है। यह
सुनिश्चित करने के लिए कि ये सख्त कानून जमीनी स्तर पर वास्तविक परिणाम दें,
सरकार ने उनके कार्यान्वयन की निरंतर निगरानी के साथ कई प्रौद्योगिकी-संचालित
पहल शुरू की हैं।
प्रमुख
पहलों में शामिल हैं:
·
यौन
अपराधों के लिए जांच ट्रैकिंग प्रणाली (आईटीएसएसओ): एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म जो समय पर पूरा होने को सुनिश्चित करने के लिए यौन उत्पीड़न
के मामलों में पुलिस जांच की वास्तविक समय की निगरानी और ट्रैकिंग को सक्षम बनाता है।
· यौन अपराधियों पर राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीएसओ): दोषी यौन अपराधियों की एक केंद्रीय रजिस्ट्री, जिसे कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को बार-बार अपराधियों की पहचान करने और ट्रैक करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
·
क्राइम मल्टी-एजेंसी सेंटर (Cri-MAC): 12 मार्च, 2020 को शुरू किया गया यह सिस्टम
अलर्ट, ईमेल और एसएमएस के माध्यम से सभी राज्यों और केंद्र शासित
प्रदेशों के पुलिस स्टेशनों और उच्च अधिकारियों के बीच जघन्य और अंतर-राज्यीय अपराधों
पर जानकारी को तुरंत साझा करने की सुविधा प्रदान करता है, जो
समन्वय को मजबूत करता है, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया मिलती है।
निष्कर्ष
इस वर्ष जब
दुनिया 25 नवंबर को शक्तिशाली वैश्विक विषय
"सभी महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ डिजिटल हिंसा को समाप्त करने के लिए एकजुट
होना" के तहत महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस मना
रही है, भारत लिंग-आधारित हिंसा का उसके सभी रूपों में मुकाबला
करने के ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से अपने प्रयासों को तेज कर रहा है -
मिशन शक्ति के वन स्टॉप सेंटर,
महिला सहायता डेस्क और आपातकालीन हेल्पलाइन
के नेटवर्क के माध्यम से, भारतीय न्याय संहिता,
2023 जैसे सुधारों और शी-बॉक्स, आईटीएसएसओ और डिजिटल शक्ति अभियान जैसे
लक्षित उपकरणों के माध्यम से, भारत सुलभ रिपोर्टिंग, उत्तरजीवी सहायता और तेज गति सुनिश्चित कर रहा है। न्याय. ये एकीकृत प्रयास
एक सुरक्षित, अधिक समावेशी वातावरण के निर्माण के लिए देश की
प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जहां हर महिला और लड़की -
ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों, सम्मान, स्वतंत्रता और समान अवसर के साथ रह सकें।
सन्दर्भ:
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https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/182/AU3003_h1PSF9.pdf?source=pqals
https://nimhansstreemanoraksha.in/project-stree-manoraksha/
राष्ट्रीय महिला आयोग:
पीडीएफ में देखने के लिए यहां क्लिक करें
पीके/केसी/एनकेएस(रिलीज़ आईडी: 2193651) आगंतुक पटल
: 889 प्रविष्टि तिथि: 24 NOV 2025 by PIB Delhi