सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

एक दिवसीय ग्लोबल शोध कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया इस आयोजन का उद्देश्य सामाजिक असमानता और गरीबी, परिणाम और समाधान के सभी पहलुओं पर प्रकाश डालना था... 15वाँ अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मेलन 2024 एवं अवार्ड समारोह 28जनवरी, 2024 सम्मान हुआ... पढ़िए आयोजन विवरण

छत्तीसगढ़ की 5 महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया 

औरंगाबाद : गोपाल किरन समाज सेवी संस्था (GKSSS) द्वारा Peoples Education Society (Mumbai),ESTD: 1945 P.E.S. Polytechnic Nagsen Vana, औरंगाबाद महाराष्ट्र के प्रांगण में में एक दिवसीय ग्लोबल शोध कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया इस आयोजन का उद्देश्य सामाजिक असमानता और गरीबी, परिणाम और समाधान के सभी पहलुओं पर प्रकाश डालना था । 15वाँ अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मेलन 2024 एवं अवार्ड समारोह 28जनवरी, 2024 को किया गया था 

भिलाई की सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख कोसा माजिक सक्रियता के लिए मिला राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार 

औरंगाबाद महाराष्ट्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मेलन 2024 में भिलाई छत्तीसगढ़ की सामाजिक कार्यकर्ता निशा देशमुख को 'कबीर साहित्यिक सिरोमनी ग्लोबल अचीवर्स पुरस्कार 2024' का गौरवशाली सम्मान प्राप्त हुआ । यह निशा देशमुख की सामाजिक सक्रियता, रचनात्मकता कार्यों, साहित्यिक अभिरुचि में उल्लेखनीय योगदान देने तथा अपने नागरिक कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी एवं नियमितता के लिए दिया गया ।

सामाजिक महत्व के शोधकार्य का संकलन केंद्र बना महाराष्ट्र का औरंगाबाद 

राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित अवार्ड एवं शोध सेमिनार कार्यक्रम में शिक्षक, प्राध्यापक, शोधार्थी ,वैज्ञानिक, साहित्यकार, बैंकर्स, ऑफीसर, सामाजिक कार्य आदि क्षेत्रों में कार्य कर रहे अग्रणी लोगो को चयनित कर पुरस्कृत किया गया जिन क्षेत्रों के लिए पुरस्कार दिए गए उनके नाम है :

1/ ओरंगाबाद ग्लोबल आइकॉन अचीवर्स अवार्ड* 

2/ Global सिंबल ऑफ नॉलेज डॉ. बी.आर. आंबेडकर Idol अवॉर्ड*

3/ ग्लोबल सावित्रीबाई फुले* *Global गौरव शिक्षक अवार्ड*

4/ ग्लोबल सामाजिक न्याय गौरव अवार्ड*

5/ फातिमा शेख बालिका अवॉर्ड*

6/ पर्यावरण अवॉर्ड*

7/ यंग साइंटिस्ट ग्लोबल अवॉर्ड 

8/ ग्लोबल म्यूजिक अवार्ड*

9/ सामाजिक भूषण अवॉर्ड*

10/ महात्मा ज्योतिबा फूले*

11/ Global साहित्यिक अवार्ड*

12/ जीनियस आर्टिस्ट ऑफ ग्लोबल आइकॉन अवॉर्ड*

13/ ग्लोबल किरन सुपर आयरन लेडी अवॉर्ड*

14/ कबीर साहित्य

 रत्न अवार्ड*

15/ राहुल संस्कृत्यान अवॉर्ड*

16/ श्रेष्ठ युवा सृजनकार अवॉर्ड*

17/ नवोदित साहित्यकार अवॉर्ड*

18/ शब्द शिल्पी सम्मान*

19/ गोपाल किरन साहित्य गौरव सम्मान 



अनुभव और मार्गदशन लेने के लिए पुरे भारत से लोग आए थे 

लगभग 14 राज्यों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोग ने इस कार्यक्रम में शामिल होकर पुरस्कार प्राप्त करने वाले लोगों के बारे में जाना और पुरस्कार प्राप्त करने वाले ने अपने अनुभव साझा कर सभी का मार्गदर्शन किया जिन राज्यों से अधिक संख्या में लोग शामिल हुए उन राज्यों के नाम है दिल्ली , उत्तराखंड , पंजाब , चंडीगढ , रजिस्थान , गुजरात , मध्य-प्रदेश , जम्मू -कश्मिर , गोवा , बिहार, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटका, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़।


अगर आप महिला अधिकार और सुरक्षा के विषयों पर अपना योगदान देना चाहते है डेली अपडेट हेतु फ़ॉलोअर बनिए

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, प्रतिबंध आणि निवारण) कायदा २०१३ या कायदानुसार, कामाच्या ठिकाणी लैंगिक छळ म्हणजे काय?

  जर हा प्रश्न तुमच्यासमोर असेल तर खालील माहिती तुमच्यासाठी आहे… सुरक्षित आणि गरिमापूर्ण वातावरण असणारे  कामाचे  ठिकाण असे असायला हवे कि ,ज्यामध्ये लैंगिक छळ थांबवन्यास कायदेशीर व्यवस्था असेल  आणि कामाच्या ठिकाणावर काम करनारया सर्व लोकानाही माहित असयाला हवे की अनिष्ट कृत्य किंवा वर्तन कोणते आहेत कामाची ठिकाणे लैंगिक छळापासून मुक्त राहावीत आणि महिलांना सुरक्षित आणि सुरक्षित वातावरण मिळावे यासाठी हा कायदा तयार करण्यात आला आहे . कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, प्रतिबंध आणि निवारण) कायदा , २०१३ या कायदानुसार, कामाच्या ठिकाणी लैंगिक छळ म्हणजे काय? लैंगिक छळ म्हणजे  खाली नमूद केलेली थेट अथवा गर्भितार्थ कृती किंवा वागणूक लैंगिक छळ हे जे कि , कोणतेही अनिष्ट कृत्य किंवा वर्तन आहे (मग ती व्यक्त किंवा निहित), जसे :- शारीरिक संपर्क किंवा आगाऊ  लैंगिक अनुकूलतेसाठी मागणी किंवा विनंती  लैंगिक रंगीत टिप्पणी करणे  पोर्नोग्राफी दाखवत आहे  लैंगिक स्वभावाचे इतर कोणतेही शारीरिक, शाब्दिक किंवा गैर-मौखिक असे आचरण. लैंगिक अर्थाच्या टिप्पणी कामाच्या ठिक...

महिलाओं की व्यवहारिक सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करवाने के लिए शासन ने नियम कानून बना दिया है और प्रत्येक कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत समिति का अनिवार्यतः गठन करने का निर्देश भी जारी कर दिया है... आप भी इस समिति की अधिकृत सदस्य बन सकती है पढ़िए कैसे...

शासकीय कार्यालयों के आंतरिक शिकायत समिति के बाहरी सदस्य बनिए और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाकर महिला शक्तिकरण के लिए अग्रणी भूमिका निभाईये... आंतरिक शिकायत समिति का महत्व आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से मुक्त, सुरक्षित और भय-रहित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत गठित की जाती है। आंतरिक शिकायत समिति के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु: 1. महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण: आईसीसी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। यह महिलाओं को डर और भय के बिना काम करने का माहौल प्रदान करती है। 2. यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निवार ण: आईसीसी यौन उत्पीड़न की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष तरीके से निवारण करती है। यह शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को सुनवाई का अवसर प्रदान करती है। 3. यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता: आईसीसी यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता बनाए रखती है। यह शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी को गुप्त रखती है। 4. ज...

किलकारी योजना मोबाइल-आधारित सेवा है, जो गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को सीधे गर्भावस्था, प्रसव और शिशु देखभाल के बारे में संदेश देकर उन्हें नवजात शिशु की देखभाल हेतु स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह एक ध्वनि-आधारित सेवा है और इसलिए ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों के बाद भी सहायता करने में सक्षम है

  किलकारी योजना पर अपडेट प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर जितनी भी महिलाए पंजीकृत हुई है , उन  महिलाओं को किलकारी योजना के माध्यम से संवादात्मक ध्वनि प्रतिक्रिया के जरिये गर्भावस्था , प्रसव और बच्चे की देखभाल के बारे में मुफ्त व साप्ताहिक अंतराल में समय-समय पर आवश्यक श्रव्य संदेश दिए जाते हैं,  और किलकारी योजना वर्तमान में २०   राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है गर्भवती माताओं के लिए  किलकारी कार्यक्रम १५   जनवरी , २०१६  को डिजिटल इंडिया पहल के एक भाग के रूप में यह एक नई मोबाइल-आधारित सेवा है , जो गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य इन सभी लाभार्थियों को यानी सभी पंजीकृत महिलाओं को  सीधे गर्भावस्था , प्रसव और शिशु देखभाल के बारे में संदेश देकर उन्हें नवजात शिशु की देखभाल हेतु स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह सेवा  ध्वनि-आधारित सेवा है और इसलिए यह सेवा ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों के बाद भी सहायता करने में सक्षम है। प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकृ...

महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 का उद्देश्य क्या है और इस अधिनियम के कार्यान्वयन की पूरी जानकारी इस वेब पेज पर है, पढ़िए कैसे ICC कामकाजी महिलाओं को संरक्षण देती है और कैसे कोई भी महिला अपने लिए गरिमामई कामकाजी वातावरण बना सकती है Sec 1

  प्रश्न / 1 / महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम , 2013 बनाए जाने का मुख्य उद्देश्य क्या है ? उत्तर / 1 / इस अधिनियम के उद्देश्य को अधिनियम शीर्ष में स्पष्ट करते   हुए अभिलिखित किया गया है कि, महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण और लैंगिक उत्पीड़न के परिवादों के निवारण तथा प्रतितोषण और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए यह अधिनियम बनाया गया है । जिसके विभिन्न व्यवहारिक पहलु है इन पहलुओं को आसानी से समझने के लिए अग्रलिखित्त बिंदुवार विश्लेषण किया गया है :- अधिनियम के उद्देश्य को तिन विशिष्ट भागों में बाटा गया है वे हैं :- A / महिलाओं   के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण :- कामकाजी महिलाओं को उनके कार्यस्थल पर सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण स्थापित करने के लिए महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम , 2013 अधिनियमित किया गया है | B / लैंगिक उत्पीड़न के परिवादों के निवारण तथा प्रतितोषण लैंगिक उत्पीडन जैसे घृणित और असहनीय मा...

महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए कि गई प्रमुख पहलों की जानकारी

  Mission Shakti  महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा कि गई प्रमुख पहलों की जानकारी भारत देश में महिला सशक्तिकरण की नई परिभाषा महिलाओं का सशक्तिकरण यह एक परिवर्तनकारी प्रक्रिया है,   जो महिलाओं को आर्थिक , सांस्कृतिक , सामाजिक /   राजनीतिक जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्राप्त हों , यह सुनिश्चित करती है। यह न केवल महिलाओं की व्यक्तिगत क्षमता को ही बढ़ाता है , बल्कि सामाजिक प्रगति में भी योगदान देता है। भारत देश ने महिलाओं को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है , उनकी सुरक्षा , आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक समावेश पर ध्यान केंद्रित किया है। यह दस्तावेज़ महिला सशक्तिकरण में भारत की प्रगति को आगे बढ़ाने वाले कुछ प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है , जो एक अधिक न्यायसंगत और समावेशी समाज बनाने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। मिशन शक्ति मंत्रालय ने १५ वें वित्त आयोग की अवधि 2021-22 से 2025-26 के दौरान महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक ...

छत्तीसगढ़ की सशक्त समाजसेवी महिलाओं को जानकारी उपलब्ध करवाने वाले डिजिटल मंच पर प्रकाशित की गई है सारी जानकारी.............. जानिये कैसे आप भी बन सकती है स्कुल, कॉलेज, अस्पताल, उद्योग, शासकीय कार्यालयों जैसे संस्थान के आंतरिक परिवाद समिति की सदस्य ........................................................ पढ़िए और जानिए एक सशक्त महिला होने का अवसर आपके पास भी कैसे है ! ................................... उम्र, शैक्षणिक योग्यता, राजनैतिक पद जैसे विषय आपको अपनी सशक्त प्रशासनिक भूमिका बनाने से रोक नहीं सकते हैं .................................. क्योकि महिलाओं के मुद्दों को दृढ़ता से रखने की सक्षमता रखने वाली महिला को आतंरिक परिवाद समिति का सदस्य बनाया जाता है .... नीचे लिखी है पूरी जानकारी 👇👇👇

  पहल करिये आंतरिक परिवाद समिति का गठन करवाने के लिए पहल करिये यदि आप कामकाजी महिला है तो अपने कार्यालय में इस समिति का गठन करवाईये और यदि कामकाजी महिला नहीं हैं तो अपने आस पास के कार्यस्थलों में आंतरिक परिवाद समिति बनवाने के लिए पहल करिए जानकारी मांगिये आपकी सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करवाना अब आपके हाथों में है क्योंकि महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम , 2013 आपको यह अधिकार प्रदान करता है की आप जिस भी कार्यक्षेत्र में जायेंगे वहां आपको उस कार्यक्षेत्र की आंतरिक परिवाद समिति का संरक्षण मिले इसलिए सभी कार्यस्थलों से आंतरिक परिवाद समिति गठन की जानकारी मांगिये |   भागीदारी दीजिए जिन कार्यस्थलों के नियोक्ताओं ने स्वविवेक से अपने कार्यस्थल पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया है उन कार्यस्थलों के कामकाजी माहौल को गरिमापूर्ण बनाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करिए और इस विषय की जानकारी को साझा करने का माध्यम बनिए । प्रश्न पुछिये ? जिन कार्यस्थलों पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन नही किया गया है ऐसे कार्यस्थलों के नियोक्ता...

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (शी-बॉक्स) का आयोजन इस पहल का उद्देश्य देश भर के कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना है

केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने ' शी-बॉक्स ' लोगो , पॉश स्वैच्छिक अनुपालन जाँच सूची , मिशन शक्ति ऐप के साथ ' शी-बॉक्स ' का एकीकरण और ' शी-बॉक्स ' पोर्टल पर कर्मयोगी भारत पॉश प्रशिक्षण लिंक का शुभारंभ कियाराष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा प्रतिज्ञा दिलाई गई , इस पहल का उद्देश्य देश भर के कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देना है   महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज ( 14 फरवरी 2026) विज्ञान भवन , नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (शी-बॉक्स) पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ; महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर और संसद सदस्यों- श्री सुधांशु त्रिवेदी , श्रीमती रेखा शर्मा , श्रीमती लवली आनंद और श्रीमती शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी ; आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय समितियों (एलसी) ...

सर्व क्षेत्रांतील महिलांसाठी कामाच्या ठिकाणी सुरक्षित, सन्मानजनक आणि छळमुक्त वातावरण निर्माण होईल याची सुनिश्चित करण्याच्या सरकारच्या वचनबद्धतेचा पुन्हा अधोरेखित करणे आणि कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, मनाई आणि निवारण) कायदा, 2013 (पॉश कायदा) च्या अंमलबजावणीला बळकटी देणे

  महिला आणि बाल विकास मंत्रालयाच्या वतीने उद्या ( 14 फेब्रुवारी 2026) विज्ञान भवन येथे कामाच्या ठिकाणी महिला सुरक्षा (शी-बॉक्स) विषयावरील राष्ट्रीय परिषदेचे आयोजन , केंद्रीय महिला आणि बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी बीजभाषण करणार तसेच राष्ट्रीय कार्यस्थळ सुरक्षा प्रतिज्ञा देणार   कामाच्या ठिकाणी महिलांसाठी सुरक्षित , सन्मानजनक आणि छळमुक्त वातावरण निर्माण करण्याप्रति सरकारची वचनबद्धता पुन्हा अधोरेखित केली जाणार   महिला आणि बाल विकास मंत्रालयाच्या वतीने उद्या ( 14 फेब्रुवारी 2026) विज्ञान भवन इथे कामाच्या ठिकाणी महिलांची सुरक्षा (शी-बॉक्स) या विषयावरील राष्ट्रीय परिषदेचे आयोजन करण्यात आले आहे. केंद्रीय महिला आणि बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी , महिला आणि बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकूर या परिषदेत सहभागी होणार आहेत. यासोबतच केंद्र सरकारची मंत्रालये/विभाग आणि राज्ये/केंद्रशासित प्रदेशांचे वरिष्ठ अधिकारी , अंतर्गत समित्या/स्थानिक समित्यांचे अध्यक्ष आणि सदस्य , समन्वय अधिकारी , आंतरराष्ट्रीय संस्था , उद्योग क्षेत्रातील आघाडीची व्यक्तिमत्वे , नागरी समाजाचे प्रति...

कार्यस्थळी महिलांच्या सुरक्षिततेवर(एसएचई-बॉक्स) महिला व बाल विकास मंत्रालयाकडून राष्ट्रीय परिषदेचे आयोजन, देशभरातील कार्यस्थळांवर महिलांसाठी सुरक्षितता आणि सन्मानाची संस्कृती रुजवणे हा उपक्रमाचा उद्देश

  केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी यांनी एसएचई-बॉक्स लोगो , पीओएसएच स्वैच्छिक अनुपालन तपासणी यादी , मिशन शक्ती अ‍ॅपशी एसएचई-बॉक्सचे एकत्रीकरण आणि कर्मयोगी भारत पीओएसएच प्रशिक्षण लिंक एसएचई-बॉक्स पोर्टलवर सुरू केली राष्ट्रीय कार्यस्थळ सुरक्षितता प्रतिज्ञा देण्यात आली   महिला आणि बाल विकास मंत्रालयाने ने आज 14 फेब्रुवारी 2026 नवी दिल्लीतील विज्ञान भवन येथे कार्यस्थळी महिलांची सुरक्षितता (एसएचई-बॉक्स) या विषयावर राष्ट्रीय परिषदेचे आयोजन केले. ही परिषद महिला व बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ; महिला व बाल विकास राज्यमंत्री सवित्री ठाकूर ; तसेच खासदार सुधांशु त्रिवेदी , रेखा शर्मा , लव्हली आनंद आणि शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया यांच्या उपस्थितीत पार पडली. उद्घाटन सत्रात अन्नपूर्णा देवी यांनी एसएचई-बॉक्स लोगो , पीओएसएच स्वैच्छिक अनुपालन तपासणी यादी , मिशन शक्ती अ‍ॅपशी एसएचई-बॉक्सचे एकत्रीकरण आणि कर्मयोगी भारत पीओएसएच प्रशिक्षण लिंक एसएचई-बॉक्स पोर्टलवर सुरू केली. त्यांनी राष्ट्रीय कार्यस्थळ सुरक्षितता प्रतिज्ञा देखील दिली , ज्यामुळे देशभरातील महिलांसाठी सुरक्षित आणि सन्मानजनक...

कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा… एक गंभीर विषय है गौरतलब रहे की इस ज्वलंत विषय पर सभी शिकायत तो करते हैं लेकिन अपनी नागरिक जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं इसलिए जानिए महिला सुरक्षा को लेकर क्या है आपकी नागरिक जिम्मेदारी…

भारत में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा एक ज्वलंत विषय है। कामकाजी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में होती गुणात्मक वृद्धि के साथ, यह चिंता बढ़ रही है कि. कार्यस्थल में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यहां कुछ मुख्य मुद्दे दिए गए हैं: यौन उत्पीड़न:   यह एक गंभीर समस्या है, जिसमें महिलाओं को अवांछित टिप्पणी, छूना, या यौन संबंध बनाने के लिए दबाव सहना पड़ता है। भेदभाव:   महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन, कम पदोन्नति के अवसर और कम सुविधाएं मिल सकती हैं। असुरक्षित कार्य वातावरण:   कुछ कार्यस्थलों में महिलाओं को असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि खराब रोशनी, अपर्याप्त सुरक्षा उपाय, और लंबे समय तक काम करना। गौरतलब रहे कि, आप भी शासकीय तंत्र का हिस्सा बनकर महिला सुरक्षा के लिए अधिकृत संरक्षक की भूमिका निभा सकते हैं  इस लिंक पर है पूरी जानकारी क्लिक करिए  आप सूचना का अधिकार प्रयोग कर महिला सुरक्षा सुनिश्चित करवा सकते हैं उल्लेखनीय है की आप इस लिंक से सूचना का अधिकार आवेदन कॉपी कर करके सभी शासकीय कार्यालयों के मुखिया को सबक सिखा सकते हैं  RTI आवेदन कॉ...