सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

नीति आयोग द्वारा ‘नारी शक्तिः महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर’ विषय पर जी20 विषयात्मक कार्यशाला का आयोजन

 Niti Ayog 2.0,आम चुनाव के बाद बदल सकता है नीति आयोग का कलेवर - niti aayog

नयी दिल्ली लीडर्स घोषणापत्र २०२३  (एनडीएलडी२०२३ ) से उत्पन्न विषय नारी शक्तिः महिला नेतृत्व वाले विकास की ओरपर एक कार्यशाला का आयोजन ८ नवंबर २०२३  को नयी दिल्ली में किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन नीति आयोग ने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाले संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ व्हट वक्र्स टू एडवांस जेंडर इक्वलिटी (आईडब्ल्यूडब्लयूएजीई)के साथ मिलकर किया। यह कार्यशाला उन सभी विषयात्मक कार्यशालाओं का हिस्सा थी जिनका एनडीएलडी २०२३ में  दिये गये कार्रवाई विषयों के तहत नीति आयोग द्वारा संचालन व उस पर  मार्गदर्शन किया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण के लिये कानूनी सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने पर चर्चा-

कार्यशाला आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण इन दोनों के जरिये अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने से जुड़े विशिष्ट विषयों पर आधारित एवं  केन्द्रित थी। कार्यशाला में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ),इस तरह के महिला समूहों को मजबूत करने, साथ ही महिला-पुरूषों के बीच कौशल अंतर को पाटने व महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने और साथ ही साथ  महिला सशक्तिकरण के लिये कानूनी सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।

कार्यशाला की शुरूआत ही नीति आयोग के सदस्य डा. वी.के. पाॅल के उद्घाटन संबोधन के साथ हुई जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा पिछले कुछ सालों के दौरान विभिन्न पहलों  , योजनाओ  और कार्यक्रमों के जरिये महिलाओं की अगुवाई में विकास पर जोर देने वाली पहलों का यहा जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने श्रम बल में महिलाओं की कम भागीदारी की चुनौती को रेखांकित करते हुये उनके लिये सक्षम परिवेश उपलब्ध कराने व  उनकी सामाजिक पूंजी का लाभ उठाने पर इन बातों पर  जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय एजेंडा और जी२०  प्राथमिकताओं के बीच तालमेल बिठाते हुये  आगे बढ़कर इन्हें हासिल की कार्रवाई योग्य रणनीति तैयार करने का आह्वान भी किया। महिला और बाल विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव डा. प्रीतम बी. यशवंत जी ने उस मिसाल के बारे में बताया जहां महिलायें केवल प्राप्तकर्ता नहीं बल्कि विकास कार्यों में भी अब सक्रिय भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि जी20 सही मायनों में एक लोक अध्यक्षता वाली संस्था है और जहांजन भागीदारीगतिविधियों के जरिये महिला नेतृत्व मे हो रहे विकास को भी प्रदर्शित किया गया।

डब्ल्यू२०  भारत की अध्यक्ष, डा. संध्या पुरेचाजी  ने इस अवसर पर कहा कि नारी शक्ति यह सभी महिलाओं की ताकत का प्रतीक है और महिलाओं के नेतृत्व में विकास समतापूर्ण समाज के लिये आवश्यक नैतिक दायित्व है।

महिलाओं के लिये सामाजिक सुरक्षा, लैंगिक समावेशी और सहायक कार्यस्थल बनाने के लिये नीतियों को बढ़ाना-

अर्थव्यवस्था में महिलायेंः इसमें महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण इन दोनों को बढ़ाने के वास्ते महिलाओं के नेतृत्व में विकास के लिये श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। घरेलू और देखभाल कार्याें में इनमे लैंगिक असमानता को पहचानना जैसे मुद्दे, ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को कार्यबल में शामिल करने में सक्षम बनाने के लिये क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, गिग इकाॅनामी की संभावनाओं को तलाशने, लैंगिक कौशल अंतर को पाटने और साथ ही साथ  महिलाओं के लिये सामाजिक सुरक्षा, लैंगिक समावेशी और सहायक कार्यस्थल बनाने के लिये नीतियों को बढ़ाना, महिला कार्यबल बढ़ाने और  उसे बनाये रखने के लिये निजी क्षेत्र की भूमिका पर चर्चा यहा पर  की गई।

महिला समूह संबंधी विषयः स्वयं सहायता समूहों (SHG )को मजबूत करने, महिला नेतृत्व वाले एफपीओ व  ग्रामीण महिला नेतृत्त्व क्षमता, महिला समूह क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना और पूरे भारत देश  में उनका विस्तार करने की रणनीति पर केन्द्रित हैं। यह खंड बड़े उत्पादक उद्यमों अथवा समूहों के गठन व  ग्रामीण महिलाओं के बीच नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ावा देने के जरिये इन महिला समूहों को आर्थिक सशक्तिकरण के अगले चरण तक पहुंचने में सक्षम बनाने के लिये रणनीति  को विकसित करने में लगा हुआ है।

महिलायें और काम का भविष्य विषयः यह खंड नौकरियों तक पहुंच बनाने के लिये डिजिटल व  कौशल संबंधी अंतर को पाटना और महिला उद्यमिता को मजबूत करना, डिजिटल कौशल और बुनियादी ढांचे तक महिलाओं की पहुंच बढ़ाने, तथा गुणवत्ता और सुरक्षा को प्राथमिकता देने, एक सुरक्षित और समावेशी डिजिटल साक्षरता अनुभव सुनिश्चित करने, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में भागीदारी को  बढ़ावा देने पर केन्द्रित है। इसमें लैंगिक भूमिकाओं को आकार देने वाले संरचनात्मक मुद्दों को संबोधित करते हुये गैर पारंपरिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया ताकि महिलाओं की उद्यमशीलता व  जीविका आकांक्षाओं के विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जा सके।

महिला सशक्तिकरण के लिये कानूनी सुरक्षा उपायों के वर्ग में बेहतर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के जरिये महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देकर एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाने, प्रभावी निगरानी, मूल्यांकन व  जवाबदेही प्रणाली स्थापित करके लिंग-अनुकूल कानूनों के कार्यान्वयन को मजबूत करने व लैंगिक विकास को आगे बढ़ाने तथा महिला नेतृत्व वाले विकास के लिये अधिक साक्ष्य-आधारित नीति के लिये लिंग आधारित अलग अलग आंकड़े विकसित करना इसमें शामिल है।  इस कार्यशाला ने लैंगिक सशक्तिगरण पर काम करने वाले विशेषज्ञों, शिक्षाविदोंनागरिक समाज और विचारक प्रतिनिधियों को व्यापक लैंगिक समानता और सशक्तिकरण के लिये मिलकर एक रोड़मैप तैयार करने का मंच प्रदान किया।

एम जी/एआर/आरपी/एम एस/डीएप्रविष्टि तिथि: 09 NOV 2023 by PIB Delhi(रिलीज़ आईडी: 1975994) आगंतुक पटल : 99


अगर आप महिला अधिकार और सुरक्षा के विषयों पर अपना योगदान देना चाहते है डेली अपडेट हेतु फ़ॉलोअर बनिए

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, प्रतिबंध आणि निवारण) कायदा २०१३ या कायदानुसार, कामाच्या ठिकाणी लैंगिक छळ म्हणजे काय?

  जर हा प्रश्न तुमच्यासमोर असेल तर खालील माहिती तुमच्यासाठी आहे… सुरक्षित आणि गरिमापूर्ण वातावरण असणारे  कामाचे  ठिकाण असे असायला हवे कि ,ज्यामध्ये लैंगिक छळ थांबवन्यास कायदेशीर व्यवस्था असेल  आणि कामाच्या ठिकाणावर काम करनारया सर्व लोकानाही माहित असयाला हवे की अनिष्ट कृत्य किंवा वर्तन कोणते आहेत कामाची ठिकाणे लैंगिक छळापासून मुक्त राहावीत आणि महिलांना सुरक्षित आणि सुरक्षित वातावरण मिळावे यासाठी हा कायदा तयार करण्यात आला आहे . कामाच्या ठिकाणी महिलांचा लैंगिक छळ (प्रतिबंध, प्रतिबंध आणि निवारण) कायदा , २०१३ या कायदानुसार, कामाच्या ठिकाणी लैंगिक छळ म्हणजे काय? लैंगिक छळ म्हणजे  खाली नमूद केलेली थेट अथवा गर्भितार्थ कृती किंवा वागणूक लैंगिक छळ हे जे कि , कोणतेही अनिष्ट कृत्य किंवा वर्तन आहे (मग ती व्यक्त किंवा निहित), जसे :- शारीरिक संपर्क किंवा आगाऊ  लैंगिक अनुकूलतेसाठी मागणी किंवा विनंती  लैंगिक रंगीत टिप्पणी करणे  पोर्नोग्राफी दाखवत आहे  लैंगिक स्वभावाचे इतर कोणतेही शारीरिक, शाब्दिक किंवा गैर-मौखिक असे आचरण. लैंगिक अर्थाच्या टिप्पणी कामाच्या ठिक...

कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा… एक गंभीर विषय है गौरतलब रहे की इस ज्वलंत विषय पर सभी शिकायत तो करते हैं लेकिन अपनी नागरिक जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं इसलिए जानिए महिला सुरक्षा को लेकर क्या है आपकी नागरिक जिम्मेदारी…

भारत में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा एक ज्वलंत विषय है। कामकाजी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में होती गुणात्मक वृद्धि के साथ, यह चिंता बढ़ रही है कि. कार्यस्थल में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। यहां कुछ मुख्य मुद्दे दिए गए हैं: यौन उत्पीड़न:   यह एक गंभीर समस्या है, जिसमें महिलाओं को अवांछित टिप्पणी, छूना, या यौन संबंध बनाने के लिए दबाव सहना पड़ता है। भेदभाव:   महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन, कम पदोन्नति के अवसर और कम सुविधाएं मिल सकती हैं। असुरक्षित कार्य वातावरण:   कुछ कार्यस्थलों में महिलाओं को असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि खराब रोशनी, अपर्याप्त सुरक्षा उपाय, और लंबे समय तक काम करना। गौरतलब रहे कि, आप भी शासकीय तंत्र का हिस्सा बनकर महिला सुरक्षा के लिए अधिकृत संरक्षक की भूमिका निभा सकते हैं  इस लिंक पर है पूरी जानकारी क्लिक करिए  आप सूचना का अधिकार प्रयोग कर महिला सुरक्षा सुनिश्चित करवा सकते हैं उल्लेखनीय है की आप इस लिंक से सूचना का अधिकार आवेदन कॉपी कर करके सभी शासकीय कार्यालयों के मुखिया को सबक सिखा सकते हैं  RTI आवेदन कॉ...

वन स्टॉप सेंटर - यह घरेलू और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को हिंसा और संकट से निपटने के लिए एक ही छत के नीचे एकीकृत सहयोग और सहायता प्रदान करता है।

  वन स्टॉप सेंटर - वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) यह   मिशन शक्ति के अंतर्गत चलाए जा रही संबल पहल का घटक है।   वन स्टॉप सेंटर घरेलू और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को हिंसा और संकट से निपटने के लिए एक ही छत के नीचे एकीकृत सहयोग और सहायता प्रदान करता है। वन स्टॉप सेंटर जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता , कानूनी सहायता और सलाह , अस्थायी आश्रय , पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करता है। देश भर में संचालित ८०२   वन स्टॉप सेंटर से दस  लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली - आज की तारीख में , स्वीकृत 878 वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) में से , देश भर में 802 ओएससी चालू हैं और इनमें 31 अक्टूबर , 2024 तक 10.12 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा , शक्ति सदन मिशन शक्ति के तहत सामर्थ्य पहल का यह एक घटक है। यह तस्करी करके लाई गई महिलाओं सहित संकटग्रस्त सभी महिलाओं के लिए एकीकृत राहत व  पुनर्वास गृह है।   वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) का   उद्देश्य यह है कि संकट की स्थिति में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सक्षम वातावरण बन...

महिलाओं की व्यवहारिक सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करवाने के लिए शासन ने नियम कानून बना दिया है और प्रत्येक कार्यस्थल पर आंतरिक शिकायत समिति का अनिवार्यतः गठन करने का निर्देश भी जारी कर दिया है... आप भी इस समिति की अधिकृत सदस्य बन सकती है पढ़िए कैसे...

शासकीय कार्यालयों के आंतरिक शिकायत समिति के बाहरी सदस्य बनिए और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाकर महिला शक्तिकरण के लिए अग्रणी भूमिका निभाईये... आंतरिक शिकायत समिति का महत्व आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से मुक्त, सुरक्षित और भय-रहित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह समिति कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत गठित की जाती है। आंतरिक शिकायत समिति के महत्व के कुछ प्रमुख बिंदु: 1. महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण: आईसीसी महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। यह महिलाओं को डर और भय के बिना काम करने का माहौल प्रदान करती है। 2. यौन उत्पीड़न की शिकायतों का निवार ण: आईसीसी यौन उत्पीड़न की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष तरीके से निवारण करती है। यह शिकायतकर्ता और प्रतिवादी दोनों को सुनवाई का अवसर प्रदान करती है। 3. यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता: आईसीसी यौन उत्पीड़न के मामलों की गोपनीयता बनाए रखती है। यह शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी को गुप्त रखती है। 4. ज...

महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए कि गई प्रमुख पहलों की जानकारी

  Mission Shakti  महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और समग्र कल्याण को बढ़ाने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा कि गई प्रमुख पहलों की जानकारी भारत देश में महिला सशक्तिकरण की नई परिभाषा महिलाओं का सशक्तिकरण यह एक परिवर्तनकारी प्रक्रिया है,   जो महिलाओं को आर्थिक , सांस्कृतिक , सामाजिक /   राजनीतिक जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्राप्त हों , यह सुनिश्चित करती है। यह न केवल महिलाओं की व्यक्तिगत क्षमता को ही बढ़ाता है , बल्कि सामाजिक प्रगति में भी योगदान देता है। भारत देश ने महिलाओं को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है , उनकी सुरक्षा , आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक समावेश पर ध्यान केंद्रित किया है। यह दस्तावेज़ महिला सशक्तिकरण में भारत की प्रगति को आगे बढ़ाने वाले कुछ प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है , जो एक अधिक न्यायसंगत और समावेशी समाज बनाने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। मिशन शक्ति मंत्रालय ने १५ वें वित्त आयोग की अवधि 2021-22 से 2025-26 के दौरान महिलाओं की सुरक्षा , संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक ...

किलकारी योजना मोबाइल-आधारित सेवा है, जो गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को सीधे गर्भावस्था, प्रसव और शिशु देखभाल के बारे में संदेश देकर उन्हें नवजात शिशु की देखभाल हेतु स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह एक ध्वनि-आधारित सेवा है और इसलिए ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों के बाद भी सहायता करने में सक्षम है

  किलकारी योजना पर अपडेट प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर जितनी भी महिलाए पंजीकृत हुई है , उन  महिलाओं को किलकारी योजना के माध्यम से संवादात्मक ध्वनि प्रतिक्रिया के जरिये गर्भावस्था , प्रसव और बच्चे की देखभाल के बारे में मुफ्त व साप्ताहिक अंतराल में समय-समय पर आवश्यक श्रव्य संदेश दिए जाते हैं,  और किलकारी योजना वर्तमान में २०   राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है गर्भवती माताओं के लिए  किलकारी कार्यक्रम १५   जनवरी , २०१६  को डिजिटल इंडिया पहल के एक भाग के रूप में यह एक नई मोबाइल-आधारित सेवा है , जो गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य इन सभी लाभार्थियों को यानी सभी पंजीकृत महिलाओं को  सीधे गर्भावस्था , प्रसव और शिशु देखभाल के बारे में संदेश देकर उन्हें नवजात शिशु की देखभाल हेतु स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह सेवा  ध्वनि-आधारित सेवा है और इसलिए यह सेवा ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों के बाद भी सहायता करने में सक्षम है। प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकृ...

उज्ज्वल भविष्य के लिए बालिकाओं को सशक्त बनाना

  अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस   उज्ज्वल भविष्य के लिए बालिकाओं को सशक्त बनाना - हर साल ११ अक्टूबर को मनाये जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस, दुनिया भर में बालिकाओं को सशक्त बनाने व उनकी सुरक्षा करने की जरूरत को पुरजोर तरीके से याद दिलाता है , यह दिन बालिकाओं के लिए लैंगिक समानता , शिक्षा और अवसरों के जैसे महत्त्व पर प्रकाश डालता है । अधिक   जानकारी   के   लिए   यहां  पर  क्लिक   करें :-   अंतर्राष्ट्रीय   बालिका   दिवस अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस ****  

छत्तीसगढ़ की सशक्त समाजसेवी महिलाओं को जानकारी उपलब्ध करवाने वाले डिजिटल मंच पर प्रकाशित की गई है सारी जानकारी.............. जानिये कैसे आप भी बन सकती है स्कुल, कॉलेज, अस्पताल, उद्योग, शासकीय कार्यालयों जैसे संस्थान के आंतरिक परिवाद समिति की सदस्य ........................................................ पढ़िए और जानिए एक सशक्त महिला होने का अवसर आपके पास भी कैसे है ! ................................... उम्र, शैक्षणिक योग्यता, राजनैतिक पद जैसे विषय आपको अपनी सशक्त प्रशासनिक भूमिका बनाने से रोक नहीं सकते हैं .................................. क्योकि महिलाओं के मुद्दों को दृढ़ता से रखने की सक्षमता रखने वाली महिला को आतंरिक परिवाद समिति का सदस्य बनाया जाता है .... नीचे लिखी है पूरी जानकारी 👇👇👇

  पहल करिये आंतरिक परिवाद समिति का गठन करवाने के लिए पहल करिये यदि आप कामकाजी महिला है तो अपने कार्यालय में इस समिति का गठन करवाईये और यदि कामकाजी महिला नहीं हैं तो अपने आस पास के कार्यस्थलों में आंतरिक परिवाद समिति बनवाने के लिए पहल करिए जानकारी मांगिये आपकी सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करवाना अब आपके हाथों में है क्योंकि महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम , 2013 आपको यह अधिकार प्रदान करता है की आप जिस भी कार्यक्षेत्र में जायेंगे वहां आपको उस कार्यक्षेत्र की आंतरिक परिवाद समिति का संरक्षण मिले इसलिए सभी कार्यस्थलों से आंतरिक परिवाद समिति गठन की जानकारी मांगिये |   भागीदारी दीजिए जिन कार्यस्थलों के नियोक्ताओं ने स्वविवेक से अपने कार्यस्थल पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया है उन कार्यस्थलों के कामकाजी माहौल को गरिमापूर्ण बनाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करिए और इस विषय की जानकारी को साझा करने का माध्यम बनिए । प्रश्न पुछिये ? जिन कार्यस्थलों पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन नही किया गया है ऐसे कार्यस्थलों के नियोक्ता...

एनटीपीसी ने बालिका सशक्तिकरण मिशन के नए संस्करण का शुभारंभ किया है, यह कार्यक्रम भारत सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पहल के अनुरूप है और इसका उद्देश्य लड़कियों की कल्पनाओं को पोषित करके और अवसरों का पता लगाने की उनकी क्षमता को बढ़ावा देकर लैंगिक असमानता को मिटाना है।

 बालिका सशक्तिकरण मिशन   बालिका सशक्तिकरण मिशन (जीईएम) का नया संस्करण लॉन्च करने की तैयारी भारत की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड अपनी प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी पहल, कर रही है।बालिका सशक्तिकरण मिशन यह कार्यक्रम भारत सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पहल के अनुरूप है व  इसका उद्देश्य यह है कि ,लड़कियों की कल्पनाओं को पोषित करके और उनके अवसरों का पता लगाने की उनकी क्षमता को बढ़ावा देकर लैंगिक असमानता को मिटाना है। बालिका सशक्तिकरण मिशन गर्मी की छुट्टियों के दौरान युवा लड़कियों के लिए पूर्ण १  महीने की कार्यशाला आयोजित कि जाती है और  उसके माध्यम से लड़कियों को  उनके सर्वांगीण उत्थान और विकास के लिए एक मंच प्रदान करता है। जीईएम का यह नया संस्करण अप्रैल 2024 से शुरू हुआ ,और  अब  यह नया संस्करण बिजली क्षेत्र के पीएसयू के 42 चिन्हित स्थानों पर समाज के वंचित वर्गों के लगभग ३,000 मेधावी बच्चों को जोड़ेगा। इसके साथ साथ ही इस  बालिका सशक्तिकरण मिशन से लाभान्वित होने वाले बच्चों की कुल संख्या १०,000 से अधिक हो जाएगी। २०१८  ...

कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ एक बड़ा कदम

विगत दिंनाक २ सितंबर २०२४ को केंद्र सरकार द्वारा महिला सुरक्षा एवं गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए नियम , कानून को सशक्त बनाया गया है और व्यथित महिलाओंको शिकायत दर्ज कराने के लिए SHe Box शी-बॉक्स नामक इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था स्थापित की गई है , जिसका सह–विस्तार विवरण अग्रलिखित है :  सभी   कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करना ! देश में हर एक कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने  केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवीजी  के नेतृत्व में २९ अगस्त २०२४ को आयोजित एक कार्यक्रम में नया शी-बॉक्स पोर्टल लॉन्च किया है। इस केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के पंजीकरण और निगरानी को कारगर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित इस लॉन्च कार्यक्रम में मंत्रालय की नई वेबसाइट का भी अनावरण किया गया। इन दोनों से ही सरकार की जनता के साथ डिजिटल सहभागिता बढ़ने की उम्मीद है।   केंद्रीय मंत्री ने लॉन्च किया शी-बॉक्स पोर्टल कार्यस्थल पर उत्पीड़न के खिलाफ एक ...