महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल यौन शोषण से निपटने के लिए एक व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचा तैयार किया बच्चों को यौन शोषण और यौन अपराधों से बचाने के लिए भारत सरकार द्वारा बाल यौन संरक्षण अधिनियम , 2012 लागू किया गया था। अधिनियम में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है कि 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति बच्चा है। पॉक्सो अधिनियम अपराध की गंभीरता के अनुसार आनुपातिक दंड का प्रावधान करता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल यौन शोषण से निपटने के लिए एक व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचा तैयार किया है , जिसमें स्कूलों से रिपोर्ट किए गए मामले भी शामिल हैं। पॉक्सो अधिनियम , 2012 के तहत स्कूल अधिकारियों सहित सभी व्यक्तियों के लिए ऐसे अपराधों की अनिवार्य रिपोर्टिंग अनिवार्य है और समयबद्ध जांच एवं बाल-हितैषी प्रक्रियाओं का प्रावधान है। इसके अलावा , किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम , 2015 और मिशन वात्सल्य के ज़रिए कार्यान्वित एकीकृत बाल संरक्षण ढांचे के तहत , बाल कल्याण समितियां (सीडब्ल्यूसी) , जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू) और विशेष किशोर पुलिस इकाइयां (एसजेपीयू)...
एक पहल, मेरी भी...
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महिलाओं का डिजिटल मंच है... जो कामकाजी महिलाओं को... संरक्षण प्रदान करने वाले कानून की पूरी जानकारी देता है और... इन विषयों पर कार्य कर रहे लोगो से परिचय भी करवाता है...